16-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 16.03.2011 "बापदादा" मधुबन
“मन्सा द्वारा प्रकृति
को सतोगुणी बनाने की सेवा करो, शुभ भावना, शुभकामना रख संस्कार मिलन की रास करो''
आज होलीएस्ट बाप अपने
बच्चों से होली मनाने आये हैं। आप सभी भी होली मनाने आये हैं। चारों ओर के दूर बैठे
हुए बच्चे भी दूर बैठे भी होली मनाने बैठे हैं। आप सभी कौन से रंग की होली मनाने आये
हैं! जानते हैं सबसे श्रेष्ठ रंग है परमात्म संग का रंग। यह रंग सदा श्रेष्ठ ते
श्रेष्ठ बनाने वाला है। जैसे बाप ऊंचे ते ऊंचा है ऐसे यह परमात्म संग ऊंचे ते ऊंचा
बनाने वाला है। हर एक बच्चे के मस्तक में चमकता हुआ भाग्य का सितारा देख रहे हैं।
यह भाग्य का सितारा सारे कल्प में आप भाग्यशाली बच्चों के सिवाए और कोई प्राप्त नहीं
कर सकता। वह श्रेष्ठ भाग्य है कि आप बच्चे ही डबल पवित्र अर्थात् होली बनते हो। वैसे
धर्मात्मायें भी हैं लेकिन वह शरीर से पवित्र नहीं बनते हैं। आप ब्राह्मण आत्माओं
की भविष्य में आत्मा भी पवित्र बनती और शरीर भी पवित्र बनता है। इनकी निशानी डबल
पवित्र तो डबल ताज प्राप्त होता है। सारे कल्प में आप संगमयुग पर बाप के संग के रंग
से डबल पवित्र डबल ताजधारी बनते हो। संगमयुग का परमात्म संग डबल पवित्र बना देता
है। तो आप होली बाप के साथ रहने से, बाप को कम्बाइण्ड बनाने से डबल पवित्र बन जाते
हो। सदा दिल में बाप का संग रहता है, यह संग कितना श्रेष्ठ है जो इतना श्रेष्ठ बना
देता है। लोग तो स्थूल रंग से होली मनाते हैं लेकिन आप बाप के संग के रंग से होली
बन जाते हो। वह भी डबल होली। तो आपकी होली दुनिया से न्यारी परमात्मा की प्यारी है।
तो नशा रहता है ना कि हमारी होली प्रभु संग के रंग के कारण आधाकल्प ऐसा पवित्र बनाती
है जो अब तक भी आपके चित्र कायदे प्रमाण पूजे जाते हैं और कोई के भी चित्र ऐसे
प्रेम पूर्वक पूजे नहीं जाते हैं। आप स्वयं अपने चित्रों को देख रहे हो। और भी पूजे
जाते हैं लेकिन इतना समय और ऐसे विधिपूर्वक पूजा नहीं होती। आप सदा उमंग और उत्साह
में रहते हो। रहते हो ना! उमंग-उत्साह में रहते हो? हाथ उठाओ। रहते हो, कभी कभी या
सदा? जो कहते हैं हम सदा उमंग-उत्साह में रहते भी हैं और दूसरे को भी उमंग-उत्साह
दिलाते हैं, वह हाथ उठाओ। कभी कभी नहीं, सदा। सदा शब्द को अण्डरलाइन करते हो ना!
लेकिन आपका यादगार, जो भी आपकी स्थिति रही है उसका यादगार आपके भक्त उत्सव के रूप
में मनाते हैं। आपने प्रभू के संग का रंग लगाया तो वह भी रंग लगाते हैं लेकिन
बॉडीकान्सेस हैं ना तो स्थूल रंग लगा देते हैं। जिस रंग में खर्चा भी बहुत और फिर
रिजल्ट भी कुछ अच्छी कुछ नहीं अच्छी, ऐसे मनाते हैं। लेकिन आपके उत्साह का यादगार
उत्सव जरूर मनाया है। आप परमात्मा का बनने के लिए पहले अपने पुराने संस्कारों को
जलाते हो और फिर प्रभु के संग का रंग लगने से सदा मनाते रहते हो। वह भी पहले जलाते
हैं फिर मनाते हैं लेकिन आपका मनाना और उन्हों के मनाने में रात दिन का अन्तर है।
वह बॉडीकान्सेस आप आत्म अभिमानी। वह देह भान में आप आत्मिक भान में।
आपको बापदादा का
डायरेक्शन है होली अर्थात् बीती सो बीती। यह भी कहते हैं हो ली लेकिन अर्थ को
प्रैक्टिकल में नहीं ला सकते। आप सब हो ली अर्थात् बीती सो बीती करते हो। करते हो
ना! कि कभी कभी करते हो? क्योंकि बीती को याद करने से व्यर्थ संकल्प बहुत चलते हैं।
समय भी व्यर्थ जाता है। जो बहुत समय के संस्कार हैं वह न चाहते भी जब चलते हैं तो
इस संगमयुग का एक-एक मिनट जो एक जन्म में 21 जन्म की प्रालब्ध बनाता है, वह एक-एक
संकल्प एक-एक मिनट कितना वैल्यूएबल है। एक सेकण्ड नहीं गया लेकिन अनेक जन्म की
प्रालब्ध में फर्क पड़ जाता है। बापदादा ने पहले भी कहा है कि संगम समय का समय और
संकल्प कभी भी व्यर्थ नहीं गंवाना है। अगर सदा प्रभु रंग में रंगे हुए हो अर्थात्
बाप को सदा का साथी बनाके रहते हो तो संगमयुग के एक-एक संकल्प और समय माना एक-एक
मिनट को सफल कर सकते हो। तो चेक करो अपने को कि एक-एक मिनट, एक-एक संकल्प सफल होता
है? या व्यर्थ भी जाता है? क्योंकि एक मिनट नहीं 21 जन्म का कनेक्शन हर मिनट और हर
संकल्प का है। इतनी वैल्यू है। तो अपनी दिल में सोचो कि इतनी वैल्यू सदा रहती है!
इस संगम के समय के लिए कहा हुआ है - “अब नहीं तो कब नहीं।'' इतनी वैल्यू सदा स्मृति
में रहे। तो आप सभी ने आज होली मनाई अर्थात् सदा बाप के संग का रंग लगाया। तो सारा
दिन चेक किया कि बाप का रंग लगा हुआ रहा? परमात्म संग में रहे या और भी कहाँ समय वा
संकल्प गया? चेक किया? कांध हिलाओ, हाथ नहीं, ऐसे करो।
बापदादा सदा ही इशारा
देते हैं कि अपने मन के शुभ सतोगुणी संकल्प द्वारा प्रकृति को भी सतोगुणी बनाते रहो।
तो वह मन्सा सेवा याद रहती है? क्योंकि अभी प्रकृति बड़े रूप में अपना कार्य करने
वाली है। यह तो छोटी सी बात है लेकिन प्रकृति को मनुष्यात्मायें तंग करती हैं तो वह
भी तंग करना शुरू करती है इसलिए बाप कहते हैं जैसे मायाजीत बनने का अटेन्शन रखते
हो। रखते हो ना! माया से वायदा है आपका काम है आना और हमारा काम है विजय प्राप्त
करना। किया है ना वायदा सभी ने? किया है? मायाजीत बनना है ना! ऐसे ही प्रकृति जीत
भी बनना है क्योंकि आपको राज्य करना है ना। आपका राज्य आ रहा है ना! नशा है ना! लोग
तो बिचारे सोचते हैं क्या होगा, डरते हैं। लेकिन आप को पता है तो अभी संगमयुग
अमृतवेला चल रहा है। तो अमृतवेले के बाद क्या आता है? सवेरा। उस सवेरे में ही हमारा
राज्य आना है। है ना नशा! हमारा राज्य है या केवल महारथियों के लिए राज्य है? आप
सबका राज्य है। आपको चिंता नहीं क्या होगा! अच्छे ते अच्छा होगा। तो आपके राज्य में
प्रकृति भी सतोप्रधान होनी है। तो प्रकृति को तमोगुणी से सतोगुणी कौन बनायेगा? कि
प्रकृति जैसी भी हो चलेगी? आपके राज्य में चलेगा? चलेगा? हाँ करो या ना करो। नहीं
चलेगी? तो प्रकृति को सतोगुणी कौन बनायेगा? आप ही बनायेंगे ना! इसलिए अभी अचानक का
पहला दृश्य, छोटा है यह, शुरू हुआ है। अभी तो बड़े-बड़े आने हैं और अचानक ही आने
हैं। जो सोच में नहीं होगा वही होना है।
बापदादा ने तो बहुत
समय से अचानक का पाठ पढ़ाया है। लेकिन अभी प्रत्यक्ष रूप में देख करके अभी अपना काम
शुरू करो। घबराओ नहीं। कहानी सुनाते हैं ना - चारों ओर आग लगी लेकिन परमात्मा के
बच्चे सेफ रहे। तो अभी भी बच्चे तो सेफ हैं ना! पेपर तो आने ही हैं लेकिन आपका डबल
काम है। एक तो निर्भय होके सामना करो, दूसरा अपने भक्त और अपने दु:खी भाई-बहिनों की
सेवा भी कौन करेगा? आप प्रभु के संग में रंग लगे हुए हो, तो जो परमात्मा के संग के
रंग में प्राप्त किया है वह अपने भाई बहिनों को, भक्तों को खूब प्यार से दिल से
बांटो। दु:ख के समय कौन याद आता है? फिर भी परमात्मा चाहे समझें चाहे नहीं समझें,
लेकिन मजबूरी से भी हे बाप, हे परमात्मा कहेंगे जरूर। तो आप परमात्म बच्चों को अभी
दु:खियों का सहारा बनना है। उन्हों को शुभ भावना शुभ कामना द्वारा, बाप द्वारा
प्राप्त हुई किरणों द्वारा सहारा बनो। फिर भी आपका परिवार है ना! तो परिवार में एक
दो को सहयोग देते हैं ना! तो नाम ही है सह योग, श्रेष्ठ योग। वही साधन है सहारा देने
का। सन्देश भी भेजा था कि समय फिक्स करो। ऐसे नहीं हो जायेगा, जैसे ट्राफिक
कन्ट्रोल, अमृतवेला निश्चित है तो करते हो ना। ऐसे अपने कार्य प्रमाण यह मन्सा सेवा
भी अभी के समय प्रमाण अति आवश्यक है। तो समय निकालो, रहमदिल बनो। कल्याणकारी बनो।
आपका स्वमान क्या है? विश्व कल्याणकारी। तो रहम आता है? कि हो जायेगा? इसमें अलबेले
नहीं बनना क्योंकि जिन्हों को आप सकाश देंगे वही आपके भक्त बनेंगे इसलिए क्या करना
है? है अटेन्शन है? जो समझते हैं हमारा अटेन्शन है और बढ़ेगा वह हाथ उठाओ। नीचे-ऊपर
कर रहे हैं। यहाँ देखने आ रहे हैं। (टी.वी. में) अगर इतने सभी ने अपने स्वमान को
प्रैक्टिकल में लाया तो आत्मायें अभी भी संगम पर आपके दिल से गीत गायेंगे वाह
परमात्म बच्चे वाह! हमें सहारा दिया। अभी का सहारा आधाकल्प आपके गीत गाते रहेंगे।
आप उसके पूर्वज हो जायेंगे। पूर्वज हो। झाड़ में कहाँ बैठे हैं ब्राह्मण! नीचे बैठे
हैं ना! तो पूर्वज हो ना! आवाज सुनने आता है भक्तों का? थोड़ा अपने को सावधान करो,
दु:खियों का सहारा बनना ही है तो आवाज सुनने आयेगी।
तो सभी ने होली तो
मनाई, आपकी तो सारा संगम ही होली है। परमात्मा के संग के रंग में ही रहते हो।
यादगार मनाते हैं एक दो दिन लेकिन आप तो पूरा संगम प्रभु के संग में रहने वाले हो।
नशा है ना! लोग बिचारे मांगते रहते हैं हे प्रभु यह कर दो, वह कर दो लेकिन आपको 21
जन्म की गैरन्टी मिली है, कभी दु:ख का स्वप्न में भी कोई दृश्य नहीं आयेगा। संकल्प
में भी दु:ख की लहर नहीं आयेगी। तो सदा हर एक को अगर राज्य लेना है तो अभी अपने
परिवार सतयुग के साथी और रॉयल प्रजा, साधारण प्रजा सब अभी बना सकते हो। 21 जन्म की
गैरन्टी है। थोड़ी सी सेवा करो, समय निकालो क्योंकि आपके पास संकल्प शक्ति तो है
ही। सिर्फ जो बाप से मिला है वह अपने भाई-बहिनों को भी दो।
बापदादा ने पहले भी
कहा था कि सदा यह चेक करो कि मुझे ब्राह्मण परिवार के बीच संस्कार मिलन की रास करना
आता है? बापदादा ने कहा था वह रास कब करेंगे उसकी डेट भी फिक्स करो। फिक्स हो सकती
है? हो सकती है? पहली लाइन बताओ। हाथ उठाओ। हो सकती है? पाण्डव भी उठाओ। पाण्डवों
के बिना गति नहीं है। अच्छा। तो अभी लास्ट टर्न है, एक टर्न रहा हुआ है। उसमें हर
एक अपने लिए क्या दृढ़ संकल्प है, वह फिक्स करके लिखना। कितना समय लगेगा, जो
ब्राह्मण परिवार में कहाँ भी कभी भी संस्कार अपना कार्य नहीं करे। चाहे मेरा
संस्कार, चाहे दूसरे का संस्कार भी, मेरे को प्रभाव नहीं डाले। यह डेट फिक्स हो सकती
है? हो सकती है? हाथ उठाओ। अच्छा, सभी का फोटो निकाला! क्योंकि जैसे यह अचानक सीन
देखी ना। (जापान में भुकम्प और सुनामी आई है जिसमें बहुत नुकसान हुआ है) ऐसे सब
अचानक ही होना है इसलिए बापदादा तैयारी तो देखेंगे ना! जब दूसरों को शुभ भावना शुभ
कामना देते हो, बापदादा ने देखा यह दूसरों की सेवा का प्रोग्राम भी बनाया था तो अगर
हर आत्मा के प्रति सदा शुभ भावना और शुभ कामना रखो, नम्बरवार तो होना ही है। आपकी
यादगार माला में सब एक नम्बर हैं क्या? नम्बरवार हैं लेकिन माला में तो पिरोये हैं
ना! नम्बर क्यों मिला? भिन्न-भिन्न संस्कार हैं लेकिन हमको संस्कार देखने के बजाए
शुभ भावना शुभ कामना रखनी है। आखिर भी ब्राह्मण परिवार है ना। कैसा भी है, परिवार
तो मेरा है ना! जैसे मेरा बाबा कहते हो, वैसे मेरा परिवार भी है। तो अच्छा है
मैजारिटी ने हाथ उठाया है। तो सभी का उमंग-उत्साह है तब तो हाथ उठाया है ना! तो एक
दो के सहयोगी बन शुभ भावना शुभ कामना की दृष्टि वृत्ति स्मृति रखने से यह रास होना
कोई बड़ी बात नहीं है। इस पर जो बहुत अच्छा नम्बर लेगा, डेट पर प्रैक्टिकल करके
दिखायेगा उनको न्यारा और प्यारा इनाम मिलेगा। इनाम अभी नहीं बतायेंगे लेकिन बापदादा
इनाम देंगे। क्यों? सेवा करने का टाइम निकालना है ना। तो यह संस्कार की खिटखिट समय
अपने तरफ खींच लेती है इसलिए समय की अभी आवश्यकता है। ठीक है ना!
यह सभी मधुबन वाले
हैं ना! (आगे बैठने वालों को देख बाबा बोले) पसन्द है ना! क्योंकि मधुबन वासी विशेष
हैं। बापदादा का भी मधुबन निवासियों प्रति दिल का प्यार है। और मधुबन वालों का भी
है। यह भी बाबा कहते, बाप से प्यार है और रहेगा। मिट नहीं सकता है। अमर है इसमें।
तब तो मधुबन वासी बने हैं ना! कहाँ भी मधुबन वासी जाते हैं तो किस रिगार्ड से देखते
हैं? मधुबन का है, मधुबन का है। इसलिए यह अटेन्शन रखना लास्ट टर्न के पहले सभी
मधुबन में कोई स्थान मुकरर करना जहाँ अपनी चिटकी डालें। लेकिन लास्ट टर्न के पहले।
सभी ने होली मनाई?
आपकी तो रोज़ होली है। अभी भी यह तो बाहर का थोड़ा मनाना होता है। कहाँ मनाने जायें,
यहीं तो मनायेंगे। लेकिन वो हुई रीति रसम। तो सभी चारों ओर के बापदादा के अति स्नेही,
अति प्यारे, लाडले, सिकीलधे, स्वमान-धारी, हर बच्चे को बापदादा पदमगुणा यादप्यार भी
दे रहे हैं और दिल का दुलार भी दे रहे हैं। बापदादा देख रहे हैं चारों ओर सब सुनके
देख के हर्षित हो रहे हैं।
अच्छा, आज पहली बारी
कौन आये हैं? उठो। यह सभी पहली बारी आये हैं। अच्छा, पहले बारी मधुबन निवासी बनने
का भाग्य प्राप्त हुआ है। सभी आपके भाई-बहिनें और बापदादा भी आप सभी को पहले बारी
आने की मुबारक दे रहे हैं। अभी बापदादा देखेंगे क्योंकि चांस है कि थोड़ी देरी से
आये हैं लेकिन जो चाहे वह अभी भी लास्ट सो फास्ट जाकरके फर्स्ट नम्बर लेकर फर्स्ट
डिवीजन में आ सकते हो। यह बापदादा का जो भी आज आये हैं उन सभी बच्चों को वरदान है।
सिर्फ जो बाप के महावाक्य हैं उस श्रीमत पर चलते रहेंगे तो श्रीमत आपको श्रेष्ठ
डिवीजन में ला सकती है, लायेगी। इतने सारे परिवार द्वारा आप सभी को, वरदान तो बाप
का होता है, लेकिन शुभ भावना शुभ कामना है कि आप जितना आगे बढ़ने चाहो उतना बढ़ सकते
हो। सभी आपको दिल से दुआयें देंगे। जहाँ भी क्लास में आते हो वहाँ आपको दुआयें मिलती
रहेंगी और वह दुआयें आपको तीव्र पुरुषार्थी बनाके आगे बढ़ायेंगी, यह निश्चय रखो।
अच्छा। अभी बापदादा सभी से बहुत बढ़िया सुन्दर गुडनाइट कर रहे हैं। अच्छा।
वरदान:-
हर संकल्प और
कर्म में सिद्धि अर्थात् सफलता प्राप्त करने वाले सम्पूर्ण मूर्त भव
संकल्पों की सिद्धि
तब प्राप्त होगी जब समर्थ संकल्पों की रचना करेंगे। जो अधिक संकल्पों की रचना करते
हैं वह उनकी पालना नहीं कर पाते इसलिए जितनी रचना ज्यादा उतनी शक्तिहीन होती है। तो
पहले व्यर्थ रचना बन्द करो तब सफलता प्राप्त होगी और कर्मों में सफलता प्राप्त करने
की युक्ति है - कर्म करने से पहले आदि-मध्य और अन्त को जानकर फिर कर्म करो। इससे ही
सम्पूर्ण मूर्त बन जायेंगे।
स्लोगन:-
समय पर दु:ख और धोखे से बचकर सफल होने वाला ही ज्ञानी (समझदार) है।
ये अव्यक्त इशारे:
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
आप होलीहंस बच्चों का
आहार भी शुद्ध, व्यवहार भी शुद्ध, अशुद्धि का नाम निशान भी न हो क्योंकि शुद्ध
दुनिया में जा रहे हो जहाँ अपवित्रता वा अशुद्धि का नामनिशान नहीं है। जब ऐसे
होलीहंस बनते हो तब भविष्य में हिज़ होलीनेस कहलाते हो।
विशेष सूचना - मास के
तीसरे रविवार का योग अभ्यास
आज मास का तीसरा
रविवार है, सभी भाई बहिनें संगठित रूप में एकत्रित होकर सायं 6.30 से 7.30 बजे तक
अपने परम पवित्र स्वरूप में स्थित हो, पवित्रता की दिव्य किरणें फैलाते हुए सर्व
आत्माओं को “पवित्र बनो-योगी बनो'' की शुभ प्रेरणायें सकाश रूप में देना की सेवा करें।