01-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम बाप के
पास आये हो रिफ्रेश होने, बाप और वर्से को याद करो तो सदा रिफ्रेश रहेंगे''
प्रश्नः-
समझदार बच्चों
की मुख्य निशानी क्या होगी?
उत्तर:-
जो समझदार हैं
उन्हें अपार खुशी होगी। अगर खुशी नहीं तो बुद्धू हैं। समझदार अर्थात् पारसबुद्धि
बनने वाले। वह दूसरों को भी पारसबुद्धि बनायेंगे। रूहानी सर्विस में बिजी रहेंगे।
बाप का परिचय देने बिगर रह नहीं सकेंगे।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस पतित दुनिया का बुद्धि से संन्यास कर पुरानी देह और देह के
सम्बन्धियों को भूल अपनी बुद्धि बाप और स्वर्ग तरफ लगानी है।
2) अविनाशी विश्राम का अनुभव करने के लिए बाप और वर्से की स्मृति में रहना है।
सबको बाप का पैगाम दे रिफ्रेश करना है। रूहानी सर्विस में लज्जा नहीं करनी है।
वरदान:-
संगठन में
एकमत और एकरस स्थिति द्वारा सफलता प्राप्त करने वाले सच्चे स्नेही भव
संगठन में एक ने कहा दूसरे
ने माना - यह है सच्चे स्नेह का रेसपान्ड। ऐसे स्नेही बच्चों का एग्जाम्पल देख और
भी सम्पर्क में आने के लिए हिम्मत रखते हैं। संगठन भी सेवा का साधन बन जाता है। जहाँ
माया देखती है कि इनकी युनिटी अच्छी है, घेराव है तो वहाँ आने की हिम्मत नहीं रखती।
एकमत और एकरस स्थिति के संस्कार ही सतयुग में एक राज्य की स्थापना करते हैं।
स्लोगन:-
कर्म
और योग का बैलेन्स रखने वाले ही सफल योगी हैं।
संगमयुगी सर्व
तीव्र पुरुषार्थी भाई बहिनों को नये युग के साथ नये वर्ष की बहुत-बहुत शुभ बंधाईयां।
नये वर्ष का यह
पहला जनवरी मास मीठे साकार बाबा की स्मृतियों का मास है, हम सभी बाबा के बच्चे
अव्यक्त वतन की सूक्ष्म लीलाओं का अनुभव करने तथा स्वयं को ब्रह्मा बाप समान
सम्पन्न वा सम्पूर्ण बनाने के लिए पूरा ही मास अपनी बन्धन-मुक्त, जीवनमुक्त स्थिति
बनाने के लिए मन और मुख का मौन रखें। बुद्धिबल से अव्यक्ति वतन की सैर करें, इसी
लक्ष्य से इस मास के अव्यक्ति इशारे भेज रहे हैं:-
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
बापदादा चाहते हैं
- मेरा एक एक बच्चा मुक्ति-जीवनमुक्ति के वर्से के अधिकारी बनें। अभी के अभ्यास की
सतयुग में नेचुरल लाइफ होगी लेकिन वर्से का अधिकार अभी संगम पर है इसलिए अगर कोई भी
बंधन खींचता है तो कारण सोचो और निवारण करो।