01-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप जो है,
जैसा है, तुम बच्चों में भी नम्बरवार पहचानते हैं, अगर सब पहचान लें तो बहुत भीड़
मच जाये''
प्रश्नः-
चारों ओर
प्रत्यक्षता का आवाज कब फैलेगा?
उत्तर:-
जब मनुष्यों
को पता पड़ेगा कि स्वयं भगवान इस पुरानी दुनिया का विनाश कराके नई दुनिया स्थापन
करने आये हैं। 2- हम सबकी सद्गति करने वाला बाप हमें भक्ति का फल देने आया है। यह
निश्चय हो तो प्रत्यक्षता हो जाए। चारों ओर हलचल मच जाए।
गीत:-
जो पिया के
साथ है....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) तकदीरवान बनने के लिए एक बाप से सच्चा-सच्चा लव रखना है। लव रखना माना
कदम-कदम एक की ही श्रीमत पर चलते रहना।
2) रोज़ पुण्य का काम अवश्य करना है। सबसे बड़ा पुण्य है सबको बाप का परिचय देना।
बाप को याद करना और सबको बाप की याद दिलाना।
वरदान:-
अपनी दृष्टि
और वृत्ति के परिवर्तन द्वारा सृष्टि को बदलने वाले साक्षात्कारमूर्त भव
अपनी वृत्ति के परिवर्तन
से दृष्टि को दिव्य बनाओ तो दृष्टि द्वारा अनेक आत्मायें अपने यथार्थ रूप, यथार्थ
घर तथा यथार्थ राजधानी देखेंगी। ऐसा यथार्थ साक्षात्कार कराने के लिए वृत्ति में जरा
भी देह-अभिमान की चंचलता न हो। तो वृत्ति के सुधार से दृष्टि दिव्य बनाओ तब यह
सृष्टि परिवर्तन होगी। देखने वाले अनुभव करेंगे कि यह नैन नहीं लेकिन यह एक जादू की
डिब्बिया हैं। यह नैन साक्षात्कार के साधन बन जायेंगे।
स्लोगन:-
सेवा
के उमंग-उत्साह के साथ, बेहद की वैराग्य वृत्ति ही सफलता का आधार है।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
मधुरता के गुण को
धारण करने वाला यहाँ भी महान् बनता है और वहाँ भी मर्तबा पाता है। मधुरता वालों को
सभी महान रूप से देखते हैं। तो यह मधुरता का विशेष गुण हर बच्चे में होना चाहिए।
मधुरता की मधु जिनके साथ है उन्हें हर कार्य में सफलता ही सफलता है। उनके जीवन से
असफलता मिट जायेगी।