02-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें आपस में बहुत-बहुत रूहानी स्नेह से रहना है, कभी भी मतभेद में नहीं आना है''

प्रश्नः-
हर एक ब्राह्मण बच्चे को अपनी दिल से कौन सी बात पूछनी चाहिए?

उत्तर:-
अपनी दिल से पूछो - 1. मैं ईश्वर की दिल पर चढ़ा हुआ हूँ! 2. मेरे में दैवी गुणों की धारणा कहाँ तक है? 3. मैं ब्राह्मण ईश्वरीय सर्विस में बाधा तो नहीं डालता! 4. सदा क्षीरखण्ड रहता हूँ! हमारी आपस में एकमत है? 5. मैं सदा श्रीमत का पालन करता हूँ?

गीत:-
भोलेनाथ से निराला.......

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बापदादा की दिल पर चढ़ने के लिए मन्सा-वाचा-कर्मणा सेवा करनी है। एक्यूरेट और आलराउन्डर बनना है।

2) ऐसा देही-अभिमानी बनना है जो कोई भी पुराने सम्बन्धी याद न आयें। आपस में बहुत-बहुत रूहानी प्यार से रहना है, लूनपानी नहीं होना है।

वरदान:-
विश्व परिवर्तन के श्रेष्ठ कार्य में अपनी अंगुली देने वाले महान सो निर्माण भव

जैसे कोई स्थूल चीज़ बनाते हैं तो उसमें सब चीजें डालते हैं, कोई साधारण मीठा या नमक भी कम हो तो बढ़िया चीज़ भी खाने योग्य नहीं बन सकती। ऐसे ही विश्व परिवर्तन के इस श्रेष्ठ कार्य के लिए हर एक रत्न की आवश्यकता है। सबकी अंगुली चाहिए। सब अपनी-अपनी रीति से बहुत-बहुत आवश्यक, श्रेष्ठ महारथी हैं इसलिए अपने कार्य की श्रेष्ठता के मूल्य को जानो, सब महान आत्मायें हो। लेकिन जितने महान हो उतने निर्माण भी बनो।

स्लोगन:-
अपनी नेचर को इज़ी (सरल) बनाओ तो सब कार्य इज़ी हो जायेंगे।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जीवन में रहते, समय नाज़ुक होते, परिस्थितियाँ, समस्यायें, वायुमण्डल डबल दूषित होते हुए भी उसके प्रभाव से मुक्त, जीवन में रहते इन सर्व भिन्न-भिन्न बन्धनों से मुक्त रहना है। एक भी सूक्ष्म बन्धन नहीं हो। ऐसा हर एक ब्राह्मण बच्चे को बन्धनमुक्त, जीवनमुक्त बनना है। संगमयुग पर ही इस जीवनमुक्त स्थिति की प्रालब्ध का अनुभव करना है।