02-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“शिव भगवानुवाच - मीठे
बच्चे, तुम मुझे याद करो और प्यार करो क्योंकि मैं ही तुम्हें सदा सुखी बनाने आया
हूँ''
प्रश्नः-
जिन बच्चों से
गफलत होती रहती है उनके मुख से कौन से बोल स्वत: निकल जाते हैं?
उत्तर:-
तकदीर में जो
होगा वह मिल जायेगा। स्वर्ग में तो जायेंगे ही। बाबा कहते यह बोल पुरुषार्थी बच्चों
के नहीं। ऊंच मर्तबा पाने का ही पुरुषार्थ करना है। जब बाप आये हैं ऊंच मर्तबा देने
तो ग़फलत मत करो।
गीत:-
बचपन के दिन
भुला न देना........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) खुशी में रहने के लिए याद की मेहनत करनी है। याद का बल आत्मा को
सतोप्रधान बनाने वाला है। प्यार से एक बाप को याद करना है।
2) ऊंच मर्तबा पाने के लिए पढ़ाई पर पूरा-पूरा ध्यान देना है। ऐसे नहीं जो तकदीर
में होगा, ग़फलत छोड़ पूरा वर्से का अधिकारी बनना है।
वरदान:-
हद की
जिम्मेवारियों को बेहद में परिवर्तन करने वाले स्मृति स्वरूप नष्टोमोहा भव
नष्टोमोहा बनने के लिए
सिर्फ अपने स्मृति स्वरूप को परिवर्तन करो। मोह तब आता है जब यह स्मृति रहती है कि
हम गृहस्थी हैं, हमारा घर, हमारा सम्बन्ध है। अब इस हद की जिम्मेवारी को बेहद की
जिम्मेवारी में परिवर्तन कर दो। बेहद की जिम्मेवारी निभायेंगे तो हद की स्वत: पूरी
हो जायेगी। लेकिन यदि बेहद की जिम्मेवारी को भूल सिर्फ हद की जिम्मेवारी निभाते हो
तो उसे और ही बिगाड़ते हो क्योंकि वह फर्ज, मोह का मर्ज हो जाता है इसलिए अपने
स्मृति स्वरूप को परिवर्तन कर नष्टोमोहा बनो।
स्लोगन:-
ऐसी
तीव्र उड़ान भरो जो बातों रूपी बादल सेकण्ड में क्रास हो जाएं।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
किसी भी कार्य की
सफलता की दो श्रेष्ठ भुजायें हैं: 1- आपसी विश्वास और 2- एकता, जहाँ संगठित रूप में
सभी की एकमत है, आपस में एक दो के प्रति विश्वास है, वहाँ सफलता गले का हार है।
संस्कार भिन्न-भिन्न हैं और रहेंगे भी लेकिन अगर कोई का संस्कार टकराने वाला है तो
दूसरा ताली नहीं बजावे। हर एक अपने को चेंज कर ले तो एकता कायम रह सकती है।