03-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - कदम-कदम पर श्रीमत पर चलते रहो, यह ब्रह्मा की मत है या शिवबाबा की, इसमें मूँझो नहीं''

प्रश्नः-
अच्छी ब्रेन वाले बच्चे कौन सी गुह्य बात सहज ही समझ सकते हैं?

उत्तर:-
ब्रह्मा बाबा समझा रहे हैं या शिवबाबा - यह बात अच्छी ब्रेन वाले सहज ही समझ लेंगे। कई तो इसमें ही मूँझ जाते हैं। बाबा कहते - बच्चे, बापदादा दोनों इकट्ठे हैं। तुम मूँझो नहीं। श्रीमत समझकर चलते रहो। ब्रह्मा की मत का रेसपॉन्सिबुल भी शिवबाबा है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सेन्सीबुल बन सच्ची सेवा में लग जाना है। जवाबदार एक बाप है इसलिए श्रीमत में संशय नहीं उठाना है। निश्चय में अडोल रहना है।

2) विचार सागर मंथन कर बाप की हर समझानी पर अटेन्शन देना है। स्वयं ज्ञान को धारण कर दूसरों को सुनाना है।

वरदान:-
अपने अनादि-आदि रीयल रूप को रियलाइज करने वाले सम्पूर्ण पवित्र भव

आत्मा के अनादि और आदि दोनों काल का ओरीज्नल स्वरुप पवित्र है। अपवित्रता आर्टीफिशल, शूद्रों की देन है। शूद्रों की चीज़ ब्राह्मण यूज़ नहीं कर सकते इसलिए सिर्फ यही संकल्प करो कि अनादि-आदि रीयल रूप में मैं पवित्र आत्मा हूँ, किसी को भी देखो तो उसके रीयल रूप को देखो, रीयल को रियलाइज करो, तो सम्पूर्ण पवित्र बन फर्स्टक्लास वा एयरकन्डीशन की टिकेट के अधिकारी बन जायेंगे।

स्लोगन:-
परमात्म दुआओं से अपनी झोली भरपूर करो तो माया समीप नहीं आ सकती।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

मैजॉरिटी बच्चों ने अभी लोहे की जंजीरें तो काट ली हैं लेकिन बहुत महीन और रॉयल धागे अभी भी बंधे हुए हैं। कई पर्सनैलिटी फील करने वाले हैं, स्वयं में अच्छाईयां हैं नहीं लेकिन महसूस ऐसे होती हैं कि हम बहुत अच्छे हैं। हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं। यह जीवन-बन्ध के धागे मैजॉरिटी में हैं, बापदादा अब इन धागों से भी मुक्त, जीवनमुक्त देखना चाहते हैं।