03-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें याद में रहने का पुरुषार्थ जरूर करना है, क्योंकि याद के बल से ही तुम विकर्माजीत बनेंगे''

प्रश्नः-
कौन सा ख्याल आया तो पुरुषार्थ में गिर पड़ेंगे? खुदाई खिदमतगार बच्चे कौन सी सेवा करते रहेंगे?

उत्तर:-
कई बच्चे समझते हैं अभी टाइम पड़ा है, पीछे पुरुषार्थ कर लेंगे, परन्तु मौत का नियम थोड़ेही है। कल-कल करते मर जायेंगे इसलिए ऐसे मत समझो बहुत वर्ष पड़े हैं, पिछाड़ी में गैलप कर लेंगे। यह ख्याल और ही गिरा देगा। जितना हो सके याद में रहने का पुरुषार्थ कर, श्रीमत पर अपना कल्याण करते रहो। रूहानी खुदाई खिदमतगार बच्चे रूहों को सैलवेज करने, पतितों को पावन बनाने की सेवा करते रहेंगे।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) यह बना बनाया ड्रामा है इसलिए विघ्नों से घबराना नहीं है। विघ्नों में याद की यात्रा को भूल नहीं जाना है। ध्यान रहे - याद की यात्रा कभी ठहर न जाए।

2) पारलौकिक बाप का परिचय सबको देते हुए पावन बनने की युक्ति बतलानी है। दैवी झाड़ का सैपलिंग लगाना है।

वरदान:-
“मैं पन'' का त्याग कर सेवा में सदा खोये रहने वाले त्यागमूर्त, सेवाधारी भव

सेवाधारी सेवा में सफलता की अनुभूति तभी कर सकते हैं जब “मैं पन'' का त्याग हो। मैं सेवा कर रही हूँ, मैंने सेवा की - इस सेवा भाव का त्याग। मैंने नहीं की लेकिन मैं करनहार हूँ, करावनहार बाप है। “मैं पन'' बाबा के लव में लीन हो जाए - इसको कहा जाता है सेवा में सदा खोये रहने वाले त्यागमूर्त सच्चे सेवाधारी। कराने वाला करा रहा है, हम निमित्त हैं। सेवा में “मैं पन'' मिक्स होना अर्थात् मोहताज बनना। सच्चे सेवाधारी में यह संस्कार हो नहीं सकते।

स्लोगन:-
व्यर्थ को समाप्त कर दो तो सेवा की ऑफर सामने आयेगी।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

एकता के लिए स्वयं में समाने की शक्ति चाहिए, इससे दूसरे का संस्कार भी अवश्य शीतल हो जायेगा। सदा एक दो में स्नेह की, श्रेष्ठता की भावना से सम्पर्क में आओ, गुणग्राही बनो तो एकता कायम रह सकती है। आपके संगठन की शुभ भावना अनेक आत्माओं को भावना का फल दिलाने के निमित्त बनेगी। उन्हें नई राह मिलेगी।