03-09-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - नाम-रूप से न्यारी कोई भी चीज़ नहीं होती, आत्मा वा परमात्मा को भी नाम-रूप से न्यारा नहीं कहेंगे, उसमें भी अविनाशी पार्ट नूँधा हुआ है''

प्रश्नः-
शिवबाबा को भोलानाथ कहकर याद करते हैं, उसे भोला क्यों कहा है?

उत्तर:-
क्योंकि बाप ही अहिल्याओं, गणिकाओं, कुब्जाओं का उद्धार करते हैं। उन्हें विश्व की राजाई का वर्सा दे देते हैं। मनुष्य तो बाप के लिए कह देते - दु:ख भी वह देता, सुख भी वह देता, परन्तु बाबा कहते हैं मैं तो तुम बच्चों के लिए सुख का राज्य स्थापन करता हूँ। मुझे दु:ख हर्ता सुख कर्ता कहा गया है। विचार करो कि मैं बाप अपने बच्चों को दु:ख कैसे दे सकता हूँ।

गीत:-
दूर देश का रहने वाला...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस अन्तिम जन्म में ज्ञान अमृत पीकर अमर बनना है। स्वयं को स्वर्ग में चलने के लायक बनाना है। बुरी आदतों को छोड़ देना है।

2) अभी पढ़ाई पढ़कर 21 जन्मों के लिए स्वर्ग में प्रिन्स-प्रिन्सेज बनना है। सच्ची-सच्ची सत्यनारायण की कथा सुन नर से नारायण बनने का पुरुषार्थ करना है।

वरदान:-
कम शब्दों द्वारा ज्ञान के सर्व राज़ों को स्पष्ट करने वाले यथार्थ और शक्तिशाली भव

कोई भी चीज़ जितनी अधिक शक्तिशाली होती है उतनी उसकी क्वान्टिटी कम होती है। ऐसे ही जब आप अपनी निर्वाण स्थिति में स्थित हो वाणी में आयेंगे तो शब्द कम लेकिन यथार्थ और शक्तिशाली होंगे। एक शब्द में हजारों शब्दों का रहस्य समाया हुआ होगा, जिससे व्यर्थ वाणी आटोमेटिक समाप्त हो जायेगी। एक शब्द से ज्ञान के सर्व राजों को स्पष्ट कर सकेंगे, विस्तार समाप्त हो जायेगा।

स्लोगन:-
दिल से बाबा कहना अर्थात् खुशी और शक्ति की प्राप्ति करना।

अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

दाता के बच्चे सर्व को देने की भावना से भरपूर बनो। कभी यह संकल्प नहीं करो कि यह हो तो मैं भी यह करूँ। ऐसी परिस्थिति हो, वायुमण्डल हो तब मैं यह करूँ। दातापन के संस्कार वाले को सब तरफ से सहयोग स्वत: प्राप्त होता है इसलिए मास्टर दाता दूसरों से लेने की भावना नहीं रख सकते।