04-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - संगम पर
तुम्हें नई और निराली नॉलेज मिलती है, तुम जानते हो हम सब आत्मायें एक्टर्स हैं, एक
का पार्ट न मिले दूसरे से''
प्रश्नः-
माया पर जीत
पाने के लिए तुम रूहानी योद्धों को (क्षत्रियों को) कौन-सी युक्ति मिली हुई है?
उत्तर:-
हे रूहानी
क्षत्रिय, तुम सदा श्रीमत पर चलते रहो। आत्म-अभिमानी बन बाप को याद करो, रोज़
सवेरे-सवेरे उठ याद में रहने का अभ्यास डालो तो माया पर विजय प्राप्त कर लेंगे।
उल्टे-सुल्टे संकल्पों से बच जायेंगे। याद की मीठी युक्ति मायाजीत बना देगी।
गीत:-
जिसका साथी है
भगवान.......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) आत्म-अभिमानी बन इस बेहद नाटक में हीरो पार्ट बजाना है। हर एक एक्टर
का पार्ट अपना-अपना है इसलिए किसी के पार्ट से रीस नहीं करनी है।
2) सवेरे-सवेरे उठकर अपने आपसे बातें करनी है, अभ्यास करना है - मैं इन शरीर की
कर्मेन्द्रियों से अलग हूँ, बाबा आप कितने मीठे हो, आप हमें सृष्टि के
आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान देते हो।
वरदान:-
बाप के
संस्कारों को अपना निजी संस्कार बनाने वाले व्यर्थ वा पुराने संस्कारों से मुक्त भव
कोई भी व्यर्थ संकल्प वा
पुराने संस्कार देह-अभिमान के संबंध से हैं, आत्मिक स्वरूप के संस्कार बाप समान
होंगे। जैसे बाप सदा विश्व कल्याणकारी, परोपकारी, रहमदिल, वरदाता....है, ऐसे स्वयं
के संस्कार नेचुरल बन जाएं। संस्कार बनना अर्थात् संकल्प, बोल और कर्म स्वत: उसी
प्रमाण चलना। जीवन में संस्कार एक चाबी हैं जिससे स्वत: चलते रहते हैं फिर मेहनत
करने की जरूरत नहीं रहती।
स्लोगन:-
आत्मिक
स्थिति में स्थित रह अपने रथ (शरीर) द्वारा कार्य कराने वाले ही सच्चे पुरुषार्थी
हैं।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
जैसे बाप ने आप
सबको कोने-कोने से ढूंढकर निकाल लिया। अनेक वृक्षों की डालियाँ अब एक ही चन्दन का
वृक्ष हो गया। लोग कहते हैं - दो चार मातायें भी एक साथ इकट्ठी नहीं रह सकती और आप
मातायें सारे विश्व में एकता स्थापन करने के निमित्त हो, यही आपकी आपसी एकता बाप की
प्रत्यक्षता करेगी।