04-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - ज्ञान सागर बाप तुम्हें ज्ञान का तीसरा
नेत्र देने आये हैं, जिससे आत्मा की ज्योति जग जाती है''
प्रश्नः-
बाप को करनकरावनहार क्यों कहा गया है? वह क्या करते और क्या कराते हैं?
उत्तर:-
बाबा कहते -
मैं तुम बच्चों को मुरली सुनाने का कार्य करता हूँ। मुरली सुनाता, मन्त्र देता,
तुम्हें लायक बनाता और फिर तुम्हारे द्वारा स्वर्ग का उद्घाटन कराता हूँ। तुम
पैगम्बर बन सबको पैगाम देते हो। मैं तुम बच्चों को डायरेक्शन देता, यही मेरी कृपा
वा आशीर्वाद है।
गीत:-
कौन आज आया
सवेरे-सवेरे...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
पास्ट इज़ पास्ट, जो बीता उसे भूलकर, गृहस्थ व्यवहार में रहते सतोप्रधान बनने का
पुरुषार्थ करना है। विनाश के पहले पावन जरूर बनना है।
2) भारत को स्वर्ग
बनाने की सच्ची-सच्ची सेवा में तत्पर रहना है। खान-पान बहुत शुद्ध रखना है। पवित्र
भोजन ही खाना है।
वरदान:-
स्थूल कार्य
करते भी मन्सा द्वारा विश्व परिवर्तन की सेवा करने वाली जिम्मेवार आत्मा भव
कोई भी स्थूल कार्य
करते सदा यह स्मृति रहे कि मैं विश्व की स्टेज पर विश्व कल्याण की सेवा अर्थ
निमित्त हूँ। मुझे अपनी श्रेष्ठ मन्सा द्वारा विश्व परिवर्तन के कार्य की बहुत बड़ी
जिम्मेवारी मिली हुई है। इस स्मृति से अलबेलापन समाप्त हो जायेगा और समय भी व्यर्थ
जाने से बच जायेगा। एक-एक सेकण्ड अमूल्य समझते हुए विश्व कल्याण के वा जड़-चैतन्य
को परिवर्तन करने के कार्य में सफल करते रहेंगे।
स्लोगन:-
अभी योद्धा
बनने के बजाए निरन्तर योगी बनो।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जैसे दु:खी आत्माओं
के मन में यह आवाज शुरूहुआ है कि अब विनाश हो, वैसे ही आप विश्व-कल्याणकारी आत्माओं
के मन में यह संकल्प उत्पन्न हो कि अब जल्दी ही सर्व का कल्याण हो तब ही समाप्ति
होगी। विनाशकारियों को कल्याणकारी आत्माओं के संकल्प का इशारा चाहिये इसलिए अपने
एवररेडी बनने के पॉवरफुल संकल्प से ज्वाला रूप योग द्वारा विनाश ज्वाला को तेज करो।