04-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस बेहद के ड्रामा में हीरो हीरोइन का
पार्ट तुम्हारा है, बाप का नहीं, बाप के पास सिर्फ पतितों को पावन बनाने का हुनर
है''
प्रश्नः-
ब्रह्मा के
चित्र को देख जो प्रश्न उठाते हैं, उन्हें कौन सा राज़ समझाना है?
उत्तर:-
उन्हें समझाओ
कि यह आदि सो अन्त वाली आत्मा है। जो फर्स्ट प्रिन्स श्रीकृष्ण है, उनके ही लास्ट
जन्म में बाप आते हैं। यह पतित तन है, इन्हें ही पावन बनना है। यह कोई भगवान नहीं।
भगवान तो एवर-प्योर है। उसने इनके तन का आधार लिया है।
गीत:-
मुखड़ा देख ले
प्राणी...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बीती बातों का कभी भी चिन्तन नहीं करना है। जो बात बीत गई, नथिंग न्यु समझ भूल जाना
है।
2) इस राजस्व अश्वमेध
यज्ञ में अपना तन-मन-धन सब स्वाहा कर सफल करना है। इस अन्तिम जन्म में सम्पूर्ण
पावन बनने की मेहनत करनी है।
वरदान:-
श्रेष्ठ वृत्ति
द्वारा प्रवृत्ति को प्रगति का साधन बनाने वाले सदा समर्थवान भव
प्रवृत्ति में पहले
वृत्ति से पवित्र वा अपवित्र बनते हो। यदि वृत्ति को सदा एक बाप के साथ लगा दो, एक
बाप दूसरा न कोई - ऐसी ऊंची वृत्ति रहे तो प्रवृत्ति प्रगति का साधन बन जायेगी।
वृत्ति ऊंची और श्रेष्ठ है तो चंचल नहीं हो सकती। ऐसी श्रेष्ठ वृत्ति द्वारा प्रगति
करते हुए गति-सद्गति को सहज ही पा लेंगे। फिर सब कम्पलेन कम्पलीट हो जायेंगी।
स्लोगन:-
अगर पवित्रता
स्वप्न मात्र भी हिलाती है तो निश्चय का फाउण्डेशन कच्चा है।
अव्यक्त इशारे - अब
अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
जब आप चमकते हुए
सितारे - सूर्य, चन्द्रमा समान अपनी सम्पूर्ण स्टेज पर अथवा मास्टर दातापन की स्टेज
पर स्थित होंगे तो भटकती हुई आत्मायें, ढूंढने वाली आत्मायें परवानों की तरह स्वत:
ही पाने के लिए, मिलने के लिए फास्ट गति से आपके पास आयेंगी और आप सबको सेकण्ड में
बाप द्वारा मुक्ति-जीवनमुक्ति का अधिकार दिलाने की तीव्रगति से सेवा करनी पड़ेगी।