04-11-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - ज्ञानवान बनो तो धनवान बन जायेंगे, जगदम्बा
ज्ञान-ज्ञानेश्वरी ही राज-राजेश्वरी बनती है''
प्रश्नः-
बाप को अपने
बच्चों पर तरस पड़ता है इसलिए श्रेष्ठ तकदीर बनाने के लिए कौन सी श्रीमत देते हैं?
उत्तर:-
मीठे बच्चे -
सिर पर जो पापों का बोझा है, उसे मौत के पहले याद की यात्रा में रहकर उतार दो। कोई
भी विकर्म नहीं करो। बाप आये हैं तुमको जमघटों की फाँसी से छुड़ाने, इसलिए अब ऐसा
कोई कर्म नहीं करना।
गीत:-
रात के राही
थक मत जाना.....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
ऐसी अवस्था बनानी है जो अन्तकाल में एक बाप की याद आये। दूसरा कोई याद न आये, बुद्धि
में रहे यह सब विनाश होने वाला है।
2) अपने आप को करेक्ट
करना है, इस अन्तिम जन्म में पवित्र जरूर बनना है। डर रखना है कि हमसे कोई पाप कर्म
न हो जाए।
वरदान:-
ड्रामा की ढाल
को सामने रख खुशी की खुराक खाने वाले सदा शक्तिशाली भव
खुशी रूपी भोजन आत्मा
को शक्तिशाली बना देता है, कहते भी हैं - खुशी जैसी खुराक नहीं। इसके लिए ड्रामा की
ढाल को अच्छी तरह से कार्य में लगाओ। यदि सदा ड्रामा की स्मृति रहे तो कभी भी मुरझा
नहीं सकते, खुशी गायब हो नहीं सकती क्योंकि यह ड्रामा कल्याणकारी है इसलिए
अकल्याणकारी दृश्य में भी कल्याण समाया हुआ है, ऐसा समझ सदा खुश रहेंगे।
स्लोगन:-
परचिंतन और
प्रदर्शन की धूल से दूर रहने वाले ही सच्चे अमूल्य हीरे हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण स्थिति का अनुभव करो
सम्पन्नता वा
सम्पूर्णता को प्राप्त करने के लिए देह के अभिमान से सम्पूर्ण समर्पण होना है। देह
का अभिमान बिल्कुल ही टूट जाए तब कहा जायेगा सर्व समर्पणमय जीवन, ऐसे जो सर्व त्यागी,
सर्व समर्पण जीवन वाले हैं उनकी ही सम्पूर्ण अवस्था गाई जाती है और जब सम्पूर्ण बन
जायेंगे तब साथ जायेंगे।