05-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप की श्रीमत से तुम मनुष्य से देवता बनते हो, गीता का ज्ञान और राजयोग तुम्हें सम्पूर्ण पावन बना देता है''

प्रश्नः-
सतयुग में हर चीज़ अच्छे से अच्छी सतोप्रधान होती है क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि वहाँ मनुष्य सतोप्रधान हैं, जब मनुष्य अच्छे हैं तो सामग्री भी अच्छी है और मनुष्य बुरे हैं तो सामग्री भी नुकसानकारक है। सतोप्रधान सृष्टि में कोई भी वस्तु अप्राप्त नहीं है, कुछ भी कहीं से मंगाना नहीं पड़ता।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) गुप्त ज्ञान का सिमरण कर हर्षित रहना है। देवताओं के चित्रों को सामने देखते, उन्हें नमन वन्दन करने के बजाए उन जैसा बनने के लिए दैवीगुण धारण करने हैं।

2) सृष्टि के बीजरूप बाप और उनकी चैतन्य क्रियेशन को समझ नॉलेजफुल बनना है, इस नॉलेज से बढ़कर और कोई नॉलेज नहीं हो सकती, इसी नशे में रहना है।

वरदान:-
“एक बाप दूसरा न कोई'' इस पाठ की स्मृति से एकरस स्थिति बनाने वाली श्रेष्ठ आत्मा भव

“एक बाप दूसरा न कोई'' यह पाठ निरन्तर याद हो तो स्थिति एकरस बन जायेगी क्योंकि नॉलेज तो सब मिल गई है, अनेक प्वाइंट्स हैं, लेकिन प्वाइंट्स होते हुए प्वाइंट रूप में रहें - यह है उस समय की कमाल जिस समय कोई नीचे खींच रहा हो। कभी बात नीचे खीचेंगी, कभी कोई व्यक्ति, कभी कोई चीज, कभी वायुमण्डल.....यह तो होगा ही। लेकिन सेकण्ड में यह सब विस्तार समाप्त हो एकरस स्थिति रहे - तब कहेंगे श्रेष्ठ आत्मा भव के वरदानी।

स्लोगन:-
नॉलेज की शक्ति धारण कर लो तो विघ्न वार करने के बजाए हार खा लेंगे।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

अभी आप सब ऐसे मुक्त बन मास्टर मुक्तिदाता बनो जो सर्व आत्मायें, प्रकृति, भगत मुक्त हो जाएं। अभी ब्रह्मा बाप इसी एक बात में डेट कान्सेस हैं, कि मेरा एक-एक बच्चा कब जीवन मुक्त बनेगा? ऐसे नहीं समझना कि अन्त में जीवनमुक्त बनेंगे, नहीं। बहुतकाल से जीवनमुक्त स्थिति का अभ्यास, बहुतकाल जीवनमुक्त राज्य भाग्य का अधिकारी बनायेगा।