05-09-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप का सहयोगी बनने के लिए सबको मनमनाभव का मन्त्र पक्का कराओ, एक बाप को सदा फॉलो करो''

प्रश्नः-
पुरुषोत्तम बनने का सहज और श्रेष्ठ पुरुषार्थ क्या है?

उत्तर:-
हे पुरुषोत्तम बनने वाले बच्चे - तुम सदा श्रीमत पर चलते रहो। एक बाप को याद करो और कोई भी बात में इन्टरफियर न करो। खाओ पियो सब कुछ करो लेकिन बाप को याद करते रहो तो पुरुषोत्तम बन जायेंगे। पुरुषोत्तम वही बनते जिन पर ब्रहस्पति की दशा है। वह कभी श्रीमत की अवज्ञा नहीं करते। उनसे कोई उल्टा कर्म नहीं होता।

गीत:-
ओम् नमो शिवाय....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कोई भी डिस-सर्विस का कार्य नहीं करना है। कोई ऐसा भी कर्म न हो जिससे बाप की निंदा हो। अवज्ञाओं से बचना है, पुरुषोत्तम बनना है।

2) माया के तूफानों से डरना नहीं पावन बनने के लिए याद में रहने का पुरुषार्थ करना है।

वरदान:-
थकी वा तड़पती हुई आत्माओं को सिद्धि देने वाले खुदाई खिदमतगार भव

आत्माओं की बहुत समय से इच्छा वा आशा है - निर्वाण वा मुक्तिधाम में जाने की। इसके लिए ही अनेक जन्मों से अनेक प्रकार की साधना करते-करते थक चुकी हैं। अभी हर एक सिद्धि चाहते हैं न कि साधना। सिद्धि अर्थात् सद्गति - तो ऐसी तड़फती हुई, थकी हुई प्यासी आत्माओं की प्यास बुझाने के लिए आप श्रेष्ठ आत्मायें अपने साइलेन्स की शक्ति वा सर्व शक्तियों से एक सेकण्ड में सिद्धि दो तब कहेंगे खुदाई खिदमतगार।

स्लोगन:-
कमजोर संस्कार ही माया के आने का चोर गेट है, अब यह गेट बन्द करो।

अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

आप भाग्य की लकीर खींचने वाले ब्रह्मा के बच्चे ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारियाँ हो इसलिए सदा आपके भण्डारे भरपूर रहें। किसको भी खाली हाथ जाने नहीं देना। सदा दाता के बच्चे देते रहो और सर्व की भावनायें, सर्व की आशायें पूर्ण करते रहो। महादानी, वरदानी बनो यही आपका स्वरूप है।