05-11-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
मीठे बच्चे - तुम्हें साइलेन्स में रहकर एक बाप को याद
करना है, इसमें घण्टे आदि बजाने की दरकार नहीं हैं“
प्रश्नः-
किस बात में
बाप समान बनो तो सब काम सिद्ध हो जायेंगे?
उत्तर:-
जैसे बाप
प्यार का सागर है वैसे बहुत-बहुत प्यारे बनो। क्रोध से काम बिगड़ता है, बनता नहीं
इसलिए आंख दिखाना, जोर से बोलना, गर्म होना, इसकी दरकार नहीं है। शान्त रहना
बहुत-बहुत अच्छा है। प्यार से बहुत काम सिद्ध हो सकते हैं।
गीत:-
तुम्हीं हो
माता पिता.....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
विकारों का दान देकर वापिस नहीं लेना है। मुख से शुभ बोलना है, बहुत मीठा बनना है।
बाप के समान प्यार का सागर बनकर रहना है।
2) साइलेन्स में रह
बिना कौड़ी खर्चा विश्व की बादशाही लेनी है। बाप की याद में रह थोड़ा बहुत खर्चा कर
21 जन्मों की आमदनी करनी है।
वरदान:-
त्रिकालदर्शी
स्थिति द्वारा माया के वार से सेफ रहने वाले अतीन्द्रिय सुख के अधिकारी भव
संगमयुग का विशेष
वरदान वा ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - अतीन्द्रिय सुख। यह अनुभव और किसी भी युग
में नहीं होता। लेकिन इस सुख की अनुभूति के लिए त्रिकालदर्शी स्थिति द्वारा माया के
वार से सेफ रहो। अगर बार-बार माया का वार होता रहेगा तो चाहते हुए भी अतीन्द्रिय
सुख का अनुभव कर नहीं पायेंगे। जो अतीन्द्रिय सुख का अनुभव कर लेते हैं उन्हें
इन्द्रियों का सुख आकर्षित कर नहीं सकता, नॉलेजफुल होने के कारण उनके सामने वह
तुच्छ दिखाई देगा।
स्लोगन:-
कर्म और मन्सा
दोनों सेवा का बैलेन्स हो तो शक्तिशाली वायुमण्डल बना सकेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण स्थिति का अनुभव करो
जैसे हैं, जो भी
परिस्थितियां सामने हैं, उन्हीं हालतों में रहते इस ही शरीर में हमको सम्पूर्ण बनना
है, यह लक्ष्य रखो। आपका संगमयुगी सम्पूर्ण रूप शक्तियों और पाण्डवों के रूप में
गाया हुआ है। जब इस स्वरूप में स्थित होंगे तब मालूम पड़ेगा कि हमारे भक्त कौन से
हैं और प्रजा कौनसी है। जो प्रजा होगी वह नज़दीक आयेंगे और जो भक्त होंगे वह पिछाड़ी
में चरणों पर झुकेंगे।