06-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - जब तुम सम्पूर्ण पावन बनोगे तब ही बाप तुम्हारी बलिहारी स्वीकार करेंगे, अपनी दिल से पूछो हम कितना पावन बने हैं!''

प्रश्नः-
तुम बच्चे अभी खुशी-खुशी से बाप पर बलि चढ़ते हो - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि तुम जानते हो, अभी हम बलिहार जाते हैं तो बाप 21 जन्मों के लिए बलिहार जाते हैं। तुम बच्चों को यह भी मालूम है कि अब इस अविनाशी रूद्र ज्ञान यज्ञ में सब मनुष्य-मात्र को स्वाहा होना ही है इसलिए तुम पहले ही खुशी-खुशी से अपना तन-मन-धन सब कुछ स्वाहा कर सफल कर लेते हो।

गीत:-
मुखड़ा देख ले प्राणी...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कर्म, अकर्म और विकर्म की गति को जान अब कोई विकर्म नहीं करना है। कर्मक्षेत्र पर कर्म करते हुए विकारों का त्याग करना ही विकर्म से बचना है।

2) ऐसा पावन बनना है जो हमारी बलिहारी बाप स्वीकार कर ले। पावन बनकर पावन दुनिया में जाना है। तन-मन-धन इस यज्ञ में स्वाहा कर सफल करना है।

वरदान:-
नॉलेज की लाइट माइट द्वारा विघ्न-विनाशाक बनने वाले मास्टर नॉलेजफुल भव

भक्ति मार्ग में गणेश को विघ्न-विनाशक कहकर पूजते हैं, साथ-साथ उन्हें मास्टर नॉलेजफुल अर्थात् विद्यापति भी मानते हैं। तो जो बच्चे मास्टर नॉलेजफुल बनते हैं वे कभी विघ्नों से हार नहीं खा सकते क्योंकि नॉलेज को लाइट-माइट कहा जाता है, जिससे मंजिल पर पहुंचना सहज हो जाता है। ऐसे जो विघ्न-विनाशक हैं, बाप के साथ सदा कम्बाइण्ड रहते हुए नॉलेज का सिमरण करते रहते हैं वे कभी विघ्न हार नहीं बन सकते।

स्लोगन:-
अन्दर बाहर जो भी बुराईयां हैं उन्हें सम्पूर्ण विल कर दो तो विल-पावर आ जायेगी।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

अभी अनुभवी बन औरों को भी अचल अडोल बनाने का, अनुभव कराने का समय है। अभी खेल करने का समय समाप्त हुआ। अब सदा समर्थ बन निर्बल आत्माओं को समर्थ बनाते चलो। आप लोगों में निर्बलता के संस्कार होंगे तो दूसरों को भी निर्बल बना देंगे। ज्ञान की हर प्वाइंट का अनुभवी बनने के लिए एकान्तप्रिय बनो, एकाग्रता का अभ्यास बढ़ाओ।