06-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - जीते जी इस शरीर से अलग हो जाओ, अशरीरी बन
बाप को याद करो, इसको ही कहा जाता है डेड साइलेन्स''
प्रश्नः-
तुम बच्चे अभी
अपना फाउन्डेशन मजबूत कर रहे हो, मजबूती किस आधार से आती है?
उत्तर:-
पवित्रता के
आधार से। जितना-जितना आत्मा पवित्र अर्थात् सच्चा सोना बनती जाती, उतनी मजबूती आती।
बाबा अभी स्वराज्य का फाउन्डेशन इतना मजबूत डालते हैं जो आधाकल्प उस फाउन्डेशन को
कोई हिला नहीं सकता। तुम्हारे राज्य को कोई छीन नहीं सकता।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
स्वराज्य लेने के लिए पवित्रता का फाउन्डेशन अभी से मजबूत करना है। जैसे बाप
पतित-पावन है ऐसे बाप समान पावन बनना है।
2) अपने शान्त
स्वधर्म में स्थित रहना है। जितना हो सके देह-अभिमान छोड़ देही-अभिमानी रहना है।
डेड साइलेन्स अर्थात् अशरीरी रहने का अभ्यास करना है।
वरदान:-
अन्य आत्माओं
की सेवा के साथ-साथ स्वयं की भी सेवा करने वाले सफलतामूर्त भव
सेवा में सफलतामूर्त
बनना है तो दूसरों की सर्विस के साथ-साथ अपनी भी सर्विस करो। जब कोई भी सर्विस पर
जाते हो तो ऐसे समझो कि सर्विस के साथ-साथ अपने भी पुराने संस्कारों का अन्तिम
संस्कार करते हैं, जितना संस्कारों का संस्कार करेंगे उतना ही सत्कार मिलेगा। सभी
आत्मायें आपके आगे मन से नमस्कार करेंगी। लेकिन बाहर से नमस्कार करने वाले नहीं
बनाना, मानसिक नमस्कार करने वाले बनाना।
स्लोगन:-
बेहद की सेवा
का लक्ष्य रखो तो हद के बन्धन सब टूट जायेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जब तक आपकी याद ज्वाला
रूप नहीं बनी है तब तक यह विनाश की ज्वाला भी सम्पूर्ण ज्वाला रुप नहीं लेती है। यह
भड़कती है, फिर शीतल हो जाती है क्योंकि ज्वाला मूर्त और प्रेरक आधार-मूर्त आत्मायें
अभी स्वयं ही सदा ज्वाला रूप नहीं बनी हैं। अब ज्वाला-रूप बनने का दृढ़ संकल्प लो
और संगठित रूप में मन-बुद्धि की एकाग्रता द्वारा पावरफुल योग के वायब्रेशन चारों ओर
फैलाओ।