07-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - कभी भी अपने हाथ में लॉ नहीं उठाओ, यदि किसी की भूल हो तो बाप को रिपोर्ट करो, बाप सावधानी देंगे''

प्रश्नः-
बाप ने कौन सा कान्ट्रैक्ट (ठेका) उठाया है?

उत्तर:-
बच्चों के अवगुण निकालने का कान्ट्रैक्ट एक बाप ने ही उठाया है। बच्चों की खामियां बाप सुनते हैं तो वह निकालने के लिए प्यार से समझानी देते हैं। अगर तुम बच्चों को किसी की खामी दिखाई देती है तो भी तुम अपने हाथ में लॉ नहीं उठाओ। लॉ हाथ में लेना यह भी भूल है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) किसी के अवगुण देख उसकी निंदा नहीं करना है। जगह-जगह पर उसके अवगुण नहीं सुनाने हैं। अपना मीठा-पन नहीं छोड़ना है। क्रोध में आकर किसी का सामना नहीं करना है।

2) सबको सुधारने वाला एक बाप है, इसलिए एक बाप को ही सब सुनाना है, अव्यभिचारी बनना है। मुरली कभी भी मिस नहीं करनी है।

वरदान:-
सदा साथीपन की स्मृति और साक्षी स्टेज का अनुभव करने वाले शिवमई शक्ति स्वरुप कम्बाइन्ड भव

जैसे आत्मा और शरीर दोनों का साथ है, जब तक इस सृष्टि पर पार्ट है तब तक अलग नहीं हो सकते, ऐसे ही शिव और शक्ति दोनों का इतना ही गहरा सम्बन्ध है। जो सदा शिव मई शक्ति स्वरुप में स्थित होकर चलते हैं तो उनकी लगन में माया विघ्न डाल नहीं सकती। वे सदा साथीपन का और साक्षी स्टेज का अनुभव करते हैं। ऐसे अनुभव होता है जैसे कोई साकार में साथ हो।

स्लोगन:-
निर्विघ्न और एकरस स्थिति का अनुभव करने के लिए एकाग्रता का अभ्यास करो।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

अपने को वर्तमान समय मैं टीचर हूँ, मैं स्टूडेंट हूँ, मैं सेवाधारी हूँ, इस समझने के बजाए अमृतवेले से यह अभ्यास करो कि मैं श्रेष्ठ आत्मा ऊपर से आई हूँ - इस पुरानी दुनिया में, पुराने शरीर में सेवा के लिए। मैं आत्मा हूँ - यह पाठ अभी और पक्का करो। मैं सेवाधारी हूँ, यह पाठ पक्का है लेकिन मैं आत्मा सेवाधारी हूँ यह पाठ पक्का कर लो तो जीवनमुक्त बन जायेंगे।