07-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - जब भी समय
मिले तो एकान्त में बैठ सच्चे माशूक को याद करो क्योंकि याद से ही स्वर्ग की बादशाही
मिलेगी''
प्रश्नः-
बाप मिला है
तो कौन सा अलबेलापन समाप्त हो जाना चाहिए?
उत्तर:-
कई बच्चे
अलबेले हो कहते हैं हम तो बाबा के हैं ही। याद की मेहनत नहीं करते। घड़ी-घड़ी याद
भूल जाती है। यही है अलबेलापन। बाबा कहते बच्चे, अगर याद में रहो तो अन्दर स्थाई
खुशी रहेगी। किसी भी प्रकार का घुटका नहीं आयेगा। जैसे बांधेलियाँ याद में तड़फती
हैं, दिन-रात याद करती हैं, ऐसे तुम्हें भी निरन्तर याद रहनी चाहिए।
गीत:-
तकदीर जगाकर
आई हूँ.....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हर कार्य करते हुए आत्म-अभिमानी बनने की प्रैक्टिस करनी है। देह का
अहंकार समाप्त हो जाए, इसके लिए ही मेहनत करनी है।
2) सतयुगी राजाई के लायक बनने के लिए अपने मैनर्स रॉयल बनाने हैं। पवित्रता ही
सबसे ऊंची चलन है। पवित्र बनने से ही पवित्र दुनिया के मालिक बनेंगे।
वरदान:-
करन-करावनहार
की स्मृति द्वारा सहजयोग का अनुभव करने वाले सफलतामूर्त भव
कोई भी कार्य करते यही
स्मृति रहे कि इस कार्य के निमित्त बनाने वाला बैकबोन कौन है। बिना बैकबोन के कोई
भी कर्म में सफलता नहीं मिल सकती, इसलिए कोई भी कार्य करते सिर्फ यह सोचो मैं
निमित्त हूँ, कराने वाला स्वयं सर्व समर्थ बाप है। यह स्मृति में रख कर्म करो तो
सहज योग की अनुभूति होती रहेगी। फिर यह सहजयोग वहाँ सहज राज्य करायेगा। यहाँ के
संस्कार वहाँ ले जायेंगे।
स्लोगन:-
इच्छायें
परछाई के समान हैं आप पीठ कर दो तो पीछे-पीछे आयेंगी।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
मधुरता ऐसी विशेष
धारणा है जो कड़वी धरनी को भी मधुर बना देती है। आप सभी को बदलने का आधार बाप के दो
मधुर बोल हैं। मीठे बच्चे तुम मीठी शुद्ध आत्मा हो। इन दो मधुर बोल ने ही बदल दिया।
मीठी दृष्टि ने बदल दिया। ऐसे ही मधुरता द्वारा औरों को भी मुधर बनाओ। यह मुख मीठा
करो। सदा इस मधुरता की सौगात को साथ रखो। इसी से सदा मीठा रहेंगे और मीठा बनायेंगे।