07-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण हो, तुम्हें ही बाप द्वारा ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है, तुम अभी ईश्वरीय गोद में हो''

प्रश्नः-
अद्वैत राज्य, जहाँ दूसरा कोई धर्म नहीं, उस राज्य की स्थापना का आधार क्या है?

उत्तर:-
योगबल। बाहुबल से कभी भी अद्वैत राज्य की स्थापना हो नहीं सकती। वैसे क्रिश्चियन के पास इतनी शक्ति है जो अगर आपस में मिल जाएं तो सारे विश्व पर राज्य कर सकते हैं, परन्तु यह लॉ नहीं कहता। विश्व पर एक राज्य की स्थापना करना बाप का ही काम है।

गीत:-
छोड़ भी दे आकाश सिंहासन...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपनी इस अमूल्य जीवन को रूहानी सेवा में लगाना है। खास भारत, आम सारी दुनिया की सेवा करनी है।

2) अपना सब कुछ सफल करने के लिए डायरेक्ट ईश्वर अर्थ अर्पण करना है। रूहानी हॉस्पिटल और युनिवर्सिटी खोलनी है।

वरदान:-
एकरस स्थिति द्वारा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति करने वाले सर्व आकर्षणों से मुक्त भव

जब इन्द्रियों की आकर्षण और सम्बन्धों की आकर्षण से मुक्त बनो तब अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति कर सकेंगे। कोई भी कर्मन्द्रिय के वश होने से जो भिन्न-भिन्न आकर्षण होते हैं वह अतीन्द्रिय सुख वा हर्ष दिलाने में बंधन डालते हैं। लेकिन जब बुद्धि सर्व आकर्षणों से मुक्त हो एक ठिकाने पर टिक जाती है, हलचल समाप्त हो जाती है तक एकरस अवस्था बनने से अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति होती है।

स्लोगन:-
अपने बुद्धि की लाइन सदा क्लीयर रखो तो एक दो के मन के भावों को जान लेंगे।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

किसी भी प्रकार की हलचल में अचल रहना, यही श्रेष्ठ ब्राह्मण आत्माओं की निशानी है। दुनिया हलचल में हो लेकिन आप श्रेष्ठ आत्मायें हलचल में नहीं आ सकती। क्यों? ड्रामा की हर सीन को जानते हो। नॉलेजफुल आत्मायें, पावर-फुल आत्मायें सदा स्वत: ही अचल रहती हैं। तो कभी वायुमण्डल से घबराओ नहीं, सदा निर्भय रहो।