07-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें नशा होना चाहिए कि हमारा बाबा आया है, हमें विश्व का मालिक बनाने, हम उनके सम्मुख बैठे हैं''

प्रश्नः-
कर्मों की गुह्य गति को जानने वाले कौन सा पुरुषार्थ अवश्य करेंगे?

उत्तर:-
याद में रहने का क्योंकि उन्हें पता है कि याद से ही पुराने हिसाब-किताब चुक्तू होने हैं। वे जानते हैं कि आत्मा अगर पुराने हिसाब-किताब, कर्मभोग चुक्तू नहीं करेगी तो उसे सजायें खानी पड़ेंगी और पद भी भ्रष्ट हो जायेगा। पुनर्जन्म भी ऐसा ही होगा।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सजाओं से मुक्त होने के लिए पुराने सब हिसाब-किताब योगबल से चुक्तू करने हैं। ट्रस्टी होकर सब कुछ सम्भालना है। किसी भी बात की चिंता नहीं करनी है। आत्म-अभिमानी बनना है।

2) यह कमाई का समय है, इसमें घरघाट, धन्धाधोरी आदि याद नहीं करना है। फरिश्ता बनने के लिए एक बाप की याद में रहने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करना है।

वरदान:-
याद की सर्चलाइट द्वारा वायुमण्डल बनाने वाले विजयी रत्न भव

सर्विसएबुल आत्माओं के मस्तक पर विजय का तिलक लगा हुआ है ही लेकिन जिस स्थान की सर्विस करनी है, उस स्थान पर पहले से ही सर्च लाइट की रोशनी डालनी चाहिए। याद की सर्चलाइट से ऐसा वायुमण्डल बन जायेगा जो अनेक आत्मायें सहज समीप आ जायेंगी। फिर कम समय में सफलता हजार गुणा होगीइसके लिए दृढ़ संकल्प करो कि हम विजयी रत्न हैं तो हर कर्म में विजय समाई हुई है।

स्लोगन:-
जो सेवा स्वयं को वा दूसरे को डिस्टर्ब करे वो सेवा, सेवा नहीं बोझ है।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

ज्वाला-रूप बनने के लिए यही धुन सदा रहे कि अब वापिस घर जाना है। जाना है अर्थात् उपराम। जब अपने निराकारी घर जाना है तो वैसा अपना वेष बनाना है। तो जाना है और सबको वापस ले जाना है - इस स्मृति से स्वत: ही सर्व-सम्बन्ध, सर्व प्रकृति की आकर्षण से उपराम अर्थात् साक्षी बन जायेंगे। साक्षी बनने से सहज ही बाप के साथी व बाप-समान बन जायेंगे।