07-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - यह संगमयुग
सर्वोत्तम बनने का शुभ समय है, क्योंकि इसी समय बाप तुम्हें नर से नारायण बनने की
पढ़ाई पढ़ाते हैं''
प्रश्नः-
तुम बच्चों के
पास ऐसी कौन-सी नॉलेज है जिसके कारण तुम किसी भी हालत में रो नहीं सकते?
उत्तर:-
तुम्हारे पास
इस बने-बनाये ड्रामा की नॉलेज है, तुम जानते हो इसमें हर आत्मा का अपना पार्ट है,
बाप हमें सुख का वर्सा दे रहे हैं फिर हम रो कैसे सकते। परवाह थी पार ब्रह्म में
रहने वाले की, वह मिल गया बाकी क्या चाहिए। बख्तावर बच्चे कभी रोते नहीं।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) ज्ञान तलवार से विकारों को जीतना है। ज्ञान के संस्कार भरने हैं।
पुरानी दुनिया और पुराने शरीर का संन्यास करना है।
2) भाग्यवान बनने की खुशी में रहना है, किसी भी बात की चिन्ता नहीं करनी है। कोई
शरीर छोड़ देता है तो भी दु:ख के आंसू नहीं बहाने हैं।
वरदान:-
कन्ट्रोलिंग
पावर द्वारा एक सेकण्ड के पेपर में पास होने वाले पास विद ऑनर भव
अभी-अभी शरीर में आना और
अभी-अभी शरीर से न्यारे बन अव्यक्त स्थिति में स्थित हो जाना। जितना हंगामा हो उतना
स्वयं की स्थिति अति शान्त हो। इसके लिए समेटने की शक्ति चाहिए। एक सेकण्ड में
विस्तार से सार में चले जायें और एक सेकण्ड में सार से विस्तार में आ जाएं, ऐसी
कन्ट्रोलिंग पावर वाले ही विश्व को कन्ट्रोल कर सकते हैं। और यही अभ्यास अन्तिम एक
सेकण्ड के पेपर में पास विद आनर बना देगा।
स्लोगन:-
वानप्रस्थ स्थिति का अनुभव करो और कराओ तो बचपन के खेल समाप्त हो जायेंगे।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
विदेही बनने में
“हे अर्जुन बनो''। अर्जुन की विशेषता - सदा बिन्दी में स्मृति स्वरूप बन विजयी बना।
ऐसे नष्टोमोहा स्मृति स्वरूप बनने वाले अर्जुन। सदा गीता ज्ञान सुनने और मनन करने
वाले अर्जुन। ऐसा विदेही, जीते जी सब मरे पड़े हैं, ऐसे बेहद की वैराग्य वृत्ति वाले
अर्जुन बनो।