08-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम देह अभिमान का द्वार बन्द कर दो तो माया के तूफान आना बन्द हो जायेंगे''

प्रश्नः-
जिन बच्चों की विशाल बुद्धि है, उनकी निशानियां सुनाओ!

उत्तर:-
1- उन्हें सारा दिन सर्विस के ही ख्यालात चलते रहेंगे। 2- वह सर्विस के बिगर रह नहीं सकते।
3- उनकी बुद्धि में रहेगा कि कैसे सारे विश्व में घेराव डाल सबको पतित से पावन बनायें। वह विश्व को दु:खधाम से सुखधाम बनाने की सेवा करते रहेंगे। 4- वह बहुतों को आप समान बनाते रहेंगे।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपने आप से प्रण करना है कि हम अपना टाइम वेस्ट नहीं करेंगे। संगम का हर पल सफल करेंगे। हम बाबा को कभी नहीं भूलेंगे। स्कालरशिप लेकर ही रहेंगे।

2) सदा स्मृति रहे कि अभी हमारी वानप्रस्थ अवस्था है। पांव नर्क तरफ, सिर स्वर्ग तरफ है। बाजोली को याद कर अथाह खुशी में रहना है। देही-अभिमानी बनने की मेहनत करनी है।

वरदान:-
अपने सर्वश्रेष्ठ पोजीशन की खुमारी द्वारा अनेक आत्माओं का कल्याण करने वाले अथॉरिटी स्वरूप भव

हम आलमाइटी अथॉरिटी के बच्चे हैं - यह है सर्वश्रेष्ठ पोजीशन, इस पोजीशन की खुमारी में रहो तो माया की अधीनता समाप्त हो जायेगी। इसी अथॉरिटी का स्वरूप बनने से किसी भी आत्मा का कल्याण कर सकते हो। जो सदा इस खुमारी में रहते हैं वो सदाकाल का राज्य भाग्य प्राप्त करते हैं। यही अथॉरिटी सदा कायम रखो तो विश्व आपके आगे झुकेगी, आप किसी के आगे झुक नहीं सकते।

स्लोगन:-
करावनहार बाप की स्मृति से मैं पन को समाप्त करो।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

मधुरता द्वारा बाप के समीपता का साक्षात्कार कराओ। आपके संकल्प में भी मधुरता, बोल में भी मधुरता, कर्म में भी मधुरता हो - यही बाप की समीपता है इसलिए बाप भी रोज़ कहते हैं - ‘मीठे-मीठे बच्चों' और बच्चे भी रेसपान्ड करते - ‘मीठे-मीठे बाबा'। यही रोज़ का मधुरता का बोल मधुर बना देता है।