08-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अभी तुम शूद्र घराने से निकल ब्राह्मण घराने में आये हो, बाप ने ब्रह्मा मुख से तुम्हें एडाप्ट किया है - तो इसी खुशी में रहो''

प्रश्नः-
कौन सा गुह्य राज़, ब्राह्मण कुल वाले बच्चे ही समझ सकते हैं?

उत्तर:-
निराकार शिवबाबा हमारा पिता है और यह ब्रह्मा हमारी माता है। निराकार भगवान कैसे मात-पिता, बन्धु-सखा बनते हैं, यह गुह्य गुप्त राज़ ब्राह्मण कुल के बच्चे ही समझ सकते हैं। उसमें भी जो दैवी कुल में ऊंच पद पाने वाले हैं वही यह राज़ यथार्थ रीति समझेंगे।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं में धारणा करने और दूसरों को कराने के लिए - सवेरे-सवेरे उठकर बाप की याद में बैठना है। जो समझा है उसे दूसरों को समझाने की प्रैक्टिस करनी है।

2) लौकिक सम्बन्धों से बुद्धि योग निकाल एक पारलौकिक बाप को याद करना है। बाप से जो ज्ञान मिला है, वह सुनकर सबको सुनाना है। यही तुम्हारा धन्धा है।

वरदान:-
समाने की शक्ति द्वारा एकमत का वातावरण बनाने वाले दृष्टान्त रूप भव

जो एक जैसे मणके हैं, एक की ही लगन और एकरस स्थिति में स्थित, एक की मत पर चलने वाले हैं, आपस में संकल्पों में भी एकमत हैं, वही माला में पिरोये जाते हैं। लेकिन एकमत का वातावरण तब बनेगा जब समाने की शक्ति होगी। यदि कोई बात में भिन्नता हो जाती है तो उस भिन्नता को समाओ तब आपस में एकता से समीप आयेंगे और सबके आगे दृष्टान्त रूप बनेंगे।

स्लोगन:-
हर संकल्प, वाणी और कर्म में रूहानियत धारण करो तब सर्विस में रौनक आयेगी।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

कोई भी दर्दनाक सीन देखते हुए नथिंग न्यु, जिन्हें यह नथिंग न्यू का पाठ पक्का है वह घबरा नहीं सकते। क्या हुआ, कैसे हुआ, यह हुआ... समाचार सुनते, देखते भी ड्रामा की बनी हुई भावी को शक्तिशाली बन देखते और औरों को भी शक्ति देते चलो। दुनिया वाले घबराते और आप एकरस स्थिति में रह उन आत्माओं में शक्ति भरते। जो भी सम्पर्क में आये, उसे शक्तियों का, शान्ति का दान देते चलो।