08-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस सभा में बाहरमुखी बनकर नहीं बैठना है,
बाप की याद में रहना है, मित्र सम्बन्धी अथवा धन्धे आदि को याद करने से वायुमण्डल
में विघ्न पड़ता है''
प्रश्नः-
तुम बच्चों के
रूहानी ड्रिल की विशेषता क्या है, जिसे मनुष्य नहीं कर सकते?
उत्तर:-
तुम्हारी
रूहानी ड्रिल बुद्धि की है, उसकी विशेषता यही है जो तुम आशिक बन अपने माशुक को याद
करते हो। इसका ही इशारा गीता में भी आया है - मनमनाभव। परन्तु मनुष्य अपने माशुक
परमात्मा को जानते ही नहीं तो ड्रिल कैसे कर सकेंगे। वे तो एक दो को जिस्मानी ड्रिल
सिखलाते हैं।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
ड्रामा के ज्ञान को बुद्धि में रख निश्चिंत बनना है। किसी भी प्रकार की चिंता नहीं
करनी है क्योंकि जानते हैं बनी बनाई बन रही... निर्मोही बनना है।
2) बाप द्वारा जबकि
ब्रहस्पति की दशा बैठी है तो सम्भाल करनी है, राहू का ग्रहण न लग जाए। कोई भी
ग्रहचारी हो तो उसे ज्ञान दान से समाप्त करना है।
वरदान:-
स्वयं के
टेन्शन पर अटेन्शन देकर विश्व का टेन्शन समाप्त करने वाले विश्व कल्याणकारी भव
जब दूसरों के प्रति
जास्ती अटेन्शन देते हो तो अपने अन्दर टेन्शन चलता है, इसलिए विस्तार करने के बजाए
सार स्वरूप में स्थित हो जाओ, क्वान्टिटी के संकल्पों को समाकर क्वालिटी वाले
संकल्प करो। पहले अपने टेन्शन पर अटेन्शन दो तब विश्व में जो अनेक प्रकार के टेन्शन
हैं उनको समाप्त कर विश्व कल्याणकारी बन सकेंगे। पहले अपने आपको देखो, अपनी सर्विस
फर्स्ट, अपनी सर्विस की तो दूसरों की सर्विस स्वत: हो जायेगी।
स्लोगन:-
योग की अनुभूति
करनी है तो दृढ़ता की शक्ति से मन को कन्ट्रोल करो।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जितना स्थापना के
निमित्त बने हुए ज्वाला-रूप होंगे उतना ही विनाश-ज्वाला प्रत्यक्ष होगी। संगठन रूप
में ज्वाला-रूप की याद विश्व के विनाश का कार्य सम्पन्न करेगी। इसके लिए हर
सेवाकेन्द्र पर विशेष योग के प्रोग्राम चलते रहें तो विनाश ज्वाला को पंखा लगेगा।
योग-अग्नि से विनाश की अग्नि जलेगी, ज्वाला से ज्वाला प्रज्जवलित होगी।