08-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम
देही-अभिमानी बनो तो सब बीमारियां खत्म हो जायेंगी और तुम डबल सिरताज विश्व के
मालिक बन जायेंगे''
प्रश्नः-
बाप के सम्मुख
किन बच्चों को बैठना चाहिए?
उत्तर:-
जिन्हें ज्ञान
डांस करना आता है। ज्ञान डांस करने वाले बच्चे जब बाप के सम्मुख होते हैं तो बाबा
की मुरली भी ऐसी चलती है। अगर कोई सामने बैठ इधर-उधर देखते तो बाबा समझते यह बच्चा
कुछ भी समझता नहीं है। बाबा ब्राह्मणियों को भी कहेंगे तुमने यह किसको लाया है, जो
बाबा के सामने भी उबासी देते हैं। बच्चों को तो ऐसा बाप मिला है, जो खुशी में डांस
करनी चाहिए।
गीत:-
दूरदेश का रहने
वाला.......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) रात को सोने से पहले बाबा से मीठी-मीठी बातें करनी हैं। बाबा हम इस
शरीर को छोड़ आपके पास आते हैं, ऐसे याद करके सोना है। याद ही मुख्य है, याद से ही
पारसबुद्धि बनेंगे।
2) 5 विकारों की बीमारी से बचने के लिए देही-अभिमानी रहने का पुरुषार्थ करना है।
अथाह खुशी में रहना है, ज्ञान डांस करना है। क्लास में सुस्ती नहीं फैलाना है।
वरदान:-
सेवा द्वारा
अनेक आत्माओं की आशीर्वाद प्राप्त कर सदा आगे बढ़ने वाले महादानी भव
महादानी बनना अर्थात् दूसरों
की सेवा करना, दूसरों की सेवा करने से स्वयं की सेवा स्वत: हो जाती है। महादानी बनना
अर्थात् स्वयं को मालामाल करना, जितनी आत्माओं को सुख, शक्ति व ज्ञान का दान देंगे
उतनी आत्माओं के प्राप्ति की आवाज या शुक्रिया जो निकलता वह आपके लिए आशीर्वाद का
रूप हो जायेगा। यह आशीर्वादें ही आगे बढ़ने का साधन हैं, जिन्हें आशीर्वादें मिलती
हैं वह सदा खुश रहते हैं। तो रोज़ अमृतवेले महादानी बनने का प्रोग्राम बनाओ। कोई
समय वा दिन ऐसा न हो जिसमें दान न हो।
स्लोगन:-
अभी का
प्रत्यक्षफल आत्मा को उड़ती कला का बल देता है।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
बाप के समीप और
समान बनने के लिए देह में रहते विदेही बनने का अभ्यास करो। जैसे कर्मातीत बनने का
एग्जैम्पल साकार में ब्रह्मा बाप को देखा, ऐसे फॉलो फादर करो। जब तक यह देह है,
कर्मेन्द्रियों के साथ इस कर्मक्षेत्र पर पार्ट बजा रहे हो, तब तक कर्म करते
कर्मेन्द्रियों का आधार लो और न्यारे बन जाओ, यही अभ्यास विदेही बना देगा।