09-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - ग्रेट ग्रेट
ग्रैण्ड फादर अर्थात् सर्व धर्म पिताओं का भी आदि पिता है प्रजापिता ब्रह्मा, जिसके
आक्यूपेशन को तुम बच्चे ही जानते हो''
प्रश्नः-
कर्मों को
श्रेष्ठ बनाने की युक्ति क्या है?
उत्तर:-
इस जन्म का
कोई भी कर्म बाप से छिपाओ नहीं, श्रीमत के अनुसार कर्म करो तो हर कर्म श्रेष्ठ होगा।
सारा मदार कर्मों के ऊपर है। अगर कोई पाप कर्म करके छिपा लेते तो उसका 100 गुणा
दण्ड पड़ता, पाप वृद्धि को पाते रहते, बाप से योग टूट जाता। फिर ऐसे छिपाने वालों
की सत्यानाश हो जाती, इसलिए सच्चे बाप के साथ सच्चे रहो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सच्चे बाप के साथ सदा सच्चा रहना है। बाप पर पूरा-पूरा बलिहार जाना
है।
2) ज्ञान को धारण कर बुद्धिवान बनना है। अन्दर से हड्डी (ज़िगरी) खुशी में रहना
है। कोई भी श्रीमत के विरूद्ध काम करके खुशी गुम नहीं करनी है।
वरदान:-
ड्रामा की
प्वाइंट के अनुभव द्वारा सदा साक्षीपन की स्टेज पर रहने वाले अचल अडोल भव
ड्रामा की प्वाइंट के जो
अनुभवी हैं वे सदा साक्षीपन की स्टेज पर स्थित रह एकरस, अचल-अडोल स्थिति का अनुभव
करते हैं। ड्रामा के प्वाइंट की अनुभवी आत्मा कभी भी बुरे में बुराई को न देख
अच्छाई ही देखेगी अर्थात् स्व-कल्याण का रास्ता दिखाई देगा। अकल्याण का खाता खत्म
हुआ। कल्याणकारी बाप के बच्चे हैं, कल्याणकारी युग है - इस नॉलेज और अनुभव की
अथॉरिटी से अचल-अडोल बनो।
स्लोगन:-
जो समय
को अमूल्य समझकर सफल करते हैं, वह समय पर धोखा नहीं खाते।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
ज्ञान-खजाने द्वारा
इस समय ही मुक्ति-जीवनमुक्ति का अनुभव करना है। जो भी दु:ख और अशान्ति के कारण हैं,
विकार हैं उनसे मुक्त होना है। अगर कोई विकार आते भी हैं तो विजयी बन जाना है, हार
नहीं खानी है। अनेक व्यर्थ संकल्प और विकल्प, विकर्मों से मुक्त बनना - यही
जीवन्मुक्त अवस्था है।