09-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - गरीब निवाज़
बाबा तुम्हें कौड़ी से हीरे जैसा बनाने आये हैं तो तुम सदा उनकी श्रीमत पर चलो''
प्रश्नः-
पहले-पहले
तुम्हें सभी को कौन सा एक गुह्य राज़ समझाना चाहिए?
उत्तर:-
“बाप-दादा''
का। तुम जानते हो यहाँ हम बापदादा के पास आये हैं। यह दोनों इकट्ठे हैं। शिव की
आत्मा भी इसमें है, ब्रह्मा की आत्मा भी है। एक आत्मा है, दूसरा परम आत्मा। तो
पहले-पहले यह गुह्य राज़ सबको समझाओ कि यह बापदादा इकट्ठे हैं। यह (दादा) भगवान नहीं
है। मनुष्य भगवान होता नहीं। भगवान कहा जाता है निराकार को। वह बाप है शान्तिधाम
में रहने वाला।
गीत:-
आखिर वह दिन
आया आज........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) निरन्तर बाप की याद में रहने के लिए बुद्धि को सोने का बर्तन बनाना
है। कर्म करते भी बाप की याद रहे, याद से ही पवित्रता की लाइट आयेगी।
2) मुरली कभी मिस नहीं करनी है। ड्रामा के राज़ को यथार्थ रीति समझना है। भट्ठी
में कुछ भी बाहर का याद न आये।
वरदान:-
आपस में एक दो
की विशेषता देखने और वर्णन करने वाले श्रेष्ठता सम्पन्न होलीहंस भव
संगमयुग पर हर बच्चे को
नॉलेज द्वारा कोई न कोई विशेष गुण अवश्य प्राप्त है, इसलिए होलीहंस बन हर एक की
विशेषता को देखो और वर्णन करो। जिस समय किसी की कमजोरी देखते या सुनते हो तो समझना
चाहिए कि यह कमजोरी इनकी नहीं, मेरी है क्योंकि हम सब एक ही बाप के, एक ही परिवार
के, एक ही माला के मणके हैं। जैसे अपनी कमजोरी को प्रसिद्ध नहीं करना चाहते ऐसे
दूसरे की कमजोरी का भी वर्णन नहीं करो। होलीहंस माना विशेषताओं को ग्रहण करना और
कमजोरियों को मिटाना।
स्लोगन:-
समय को
बचाने वाले तीव्र पुरुषार्थी ही सदा विजयी हैं।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
जैसे मणकों की
विशेषता होती है - एक जैसे मणके माला के एक ही धागे में पिरोये जाते हैं। ऐसे आप सभी
वैजयन्ती माला के मणके भी जब एकमत, एक की ही लगन में एकरस स्थिति वाले एक दिखाई
देंगे तब ही माला में पिरोये जायेंगे। अगर आपस में दो मतें होती हैं तो वह दूसरी
अर्थात् 16000 की माला के दाने बन जाते हैं।