10-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारी
याद की यात्रा बिल्कुल ही गुप्त है, तुम बच्चे अभी मुक्तिधाम में जाने की यात्रा कर
रहे हो''
प्रश्नः-
स्थूलवतन वासी
से सूक्ष्मवतन वासी फरिश्ता बनने का पुरुषार्थ क्या है?
उत्तर:-
सूक्ष्मवतन
वासी फरिश्ता बनना है तो रूहानी सर्विस में हड्डी-हड्डी स्वाहा करो। बिना हड्डी
स्वाहा किये फरिश्ता नहीं बन सकते क्योंकि फरिश्ते बिगर हड्डी मास के होते हैं। इस
बेहद की सेवा में दधीचि ऋषि की तरह हड्डी-हड्डी लगानी है, तभी व्यक्त से अव्यक्त
बनेंगे।
गीत:-
धीरज धर मनुवा........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अन्तिम विनाश की सीन देखने के लिए अपनी स्थिति महावीर जैसी निर्भय,
अडोल बनानी है। गुप्त याद की यात्रा में रहना है।
2) अव्यक्त वतनवासी फरिश्ता बनने के लिए बेहद सेवा में दधीचि ऋषि की तरह अपनी
हड्डी-हड्डी स्वाहा करनी है।
वरदान:-
पहली श्रीमत
पर विशेष अटेन्शन दे फाउण्डेशन को मजबूत बनाने वाले सहजयोगी भव
बापदादा की नम्बरवन श्रीमत
है कि अपने को आत्मा समझकर बाप को याद करो। यदि आत्मा के बजाए अपने को साधारण
शरीरधारी समझते हो तो याद टिक नहीं सकती। वैसे भी कोई दो चीजों को जब जोड़ा जाता है
तो पहले समान बनाते हैं, ऐसे ही आत्मा समझकर याद करो तो याद सहज हो जायेगी। यह
श्रीमत ही मुख्य फाउण्डेशन है। इस बात पर बार-बार अटेन्शन दो तो सहजयोगी बन जायेंगे।
स्लोगन:-
कर्म
आत्मा का दर्शन कराने वाला दर्पण है इसलिए कर्म द्वारा शक्ति स्वरुप को प्रत्यक्ष
करो।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
ब्राह्मण सो
फरिश्ता अर्थात् जीवनमुक्त, जीवन-बंध नहीं। न देह का बंधन, न देह के संबंध का बंधन,
न देह के पदार्थों का बंधन। अगर अपनी देह का लगाव खत्म किया तो देह के संबंध और
पदार्थ का बंधन आपे ही खत्म हो जायेगा। ऐसे नहीं कोशिश करेंगे। ‘कोशिश' शब्द ही
सिद्ध करता है कि पुरानी दुनिया की कशिश है इसलिए ‘कोशिश' शब्द समाप्त करो। देहभान
को छोड़ो।