11-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 20.10.2008 "बापदादा" मधुबन
सन्तुष्टमणि बन विश्व
में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो
वरदान:-
कम्बाइन्ड
स्वरुप की स्मृति और पोजीशन के नशे द्वारा कल्प-कल्प के अधिकारी भव
मैं और मेरा बाबा -
इस स्मृति में कम्बाइन्ड रहो तथा यह श्रेष्ठ पोजीशन सदा स्मृति में रहे कि हम आज
ब्राह्मण हैं कल देवता बनेंगे। हम सो, सो हम का मन्त्र सदा याद रहे तो इस नशे और
खुशी में पुरानी दुनिया सहज भूल जायेगी। सदा यही खुमारी रहेगी कि हम ही कल्प-कल्प
की अधिकारी आत्मा हैं। हम ही थे, हम ही हैं और हम ही कल्प-कल्प होंगे।
स्लोगन:-
स्वयं का स्वयं ही टीचर बनो तो सर्व कमजोरियां स्वत: समाप्त हो जायेंगी।
अव्यक्त इशारे - इस
अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
वैसे बन्धना किसी को
भी अच्छा नहीं लगता है, लेकिन जब परवश हो जाते हो तो बंध जाते हो। तो चेक करो कि
परवश आत्मा हैं या स्वतन्त्र हैं? जीवन-मुक्ति का मजा तो अभी है। भविष्य में
जीवन-मुक्त और जीवन-बन्ध का कान्ट्रास्ट नहीं होगा। इस समय के जीवनमुक्त का अनुभव
श्रेष्ठ है। जीवन में हैं लेकिन मुक्त हैं, बन्धन में नहीं हैं।