11-08-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें पढ़ाई से अपनी कर्मातीत अवस्था बनानी है, साथ-साथ पतित से पावन बनाने का रास्ता भी बताना है, रूहानी सर्विस करनी है''

प्रश्नः-
कौन-सा मंत्र याद रखो तो पाप कर्मों से बच जायेंगे?

उत्तर:-
बाप ने मंत्र दिया है - हियर नो ईविल, सी नो ईविल...... यही मंत्र याद रखो। तुम्हें अपनी कर्मेन्द्रियों से कोई पाप नहीं करना है। कलियुग में सबसे पाप कर्म ही होते हैं इसलिए बाबा यह युक्ति बताते हैं, पवित्रता का गुण धारण करो - यही नम्बरवन गुण है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अन्दर से आसुरीपने को समाप्त करने के लिए चलते-फिरते स्वदर्शन चक्रधारी होकर रहना है। सारा चक्र स्मृति में लाना है।

2) बाप की याद के साथ-साथ बुद्धि परमधाम घर में भी लगी रहे। बाप ने जो स्मृतियां दिलाई हैं उनका सिमरण कर अपना कल्याण करना है।

वरदान:-
सर्वगुण सम्पन्न बनने के साथ-साथ किसी एक विशेषता में विशेष प्रभावशाली भव

जैसे डाक्टर्स जनरल बीमारियों की नॉलेज तो रखते ही हैं लेकिन साथ-साथ किसी बात की विशेष नॉलेज में नामीग्रामी हो जाते हैं ऐसे आप बच्चों को सर्वगुण सम्पन्न तो बनना ही है फिर भी एक विशेषता को विशेष रूप से अनुभव में लाते, सेवा में लाते आगे बढ़ते चलो। जैसे सरस्वती को विद्या की देवी, लक्ष्मी को धन की देवी कह-कर पूजते हैं। ऐसे अपने में सर्वगुण, सर्वशक्तियां होते भी एक विशेषता में विशेष रिसर्च कर स्वयं को प्रभावशाली बनाओ।

स्लोगन:-
विकारों रूपी सांपों को सहजयोग की शैया बना दो तो सदा निश्चिंत रहेंगे।

अव्यक्त इशारे - सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो

जब मन ही बाप का है तो फिर मन कैसे लगायें! प्यार कैसे करें! यह प्रश्न ही नहीं उठ सकता क्योंकि सदा लवलीन रहते हैं, प्यार स्वरूप, मास्टर प्यार के सागर बन गये, तो प्यार करना नहीं पड़ता, प्यार का स्वरुप हो गये। जितना-जितना ज्ञान सूर्य की किरणें वा प्रकाश बढ़ता है, उतना ही ज्यादा प्यार की लहरें उछलती हैं।