12-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें पावन दुनिया में चलना है इसलिए काम महाशत्रु पर जीत पानी है, कामजीत, जगतजीत बनना है''

प्रश्नः-
हर एक अपनी एक्टिविटी से कौन-सा साक्षात्कार सबको करा सकते हैं?

उत्तर:-
मैं हंस हूँ या बगुला हूँ? यह हर एक अपनी एक्टिविटी से सबको साक्षात्कार करा सकते हैं क्योंकि हंस कभी किसी को दु:ख नहीं देंगे। बगुले दु:ख देते हैं, वह विकारी होते हैं। तुम बच्चे अभी बगुले से हंस बने हो। तुम पारसबुद्धि बनने वाले बच्चों का कर्तव्य है सबको पारसबुद्धि बनाना।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) माया के धोखों से बचने के लिए इच्छा मात्रम् अविद्या बनना है। इस डर्टी दुनिया से दिल नहीं लगानी है।

2) पवित्रता का पूरा-पूरा सबूत देना है। सबसे ऊंचा कैरेक्टर ही पवित्रता है। अपने आपको सुधारने के लिए पवित्र जरूर बनना है।

वरदान:-
त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित रह सदा अचल और साक्षी रहने वाले नम्बरवन तकदीरवान भव

त्रिकालदर्शी स्थिति में स्थित होकर हर संकल्प, हर कर्म करो और हर बात को देखो, यह क्यों, यह क्या - यह क्वेश्चन मार्क न हो, सदा फुलस्टॉप। नथिंगन्यु। हर आत्मा के पार्ट को अच्छी तरह से जानकर पार्ट में आओ। आत्माओं के सम्बन्ध-सम्पर्क में आते न्यारे और प्यारे पन की समानता रहे तो हलचल समाप्त हो जायेगी। ऐसे सदा अचल और साक्षी रहना - यही है नम्बरवन तकदीरवान आत्मा की निशानी।

स्लोगन:-
सहनशीलता के गुण को धारण करो तो कठोर संस्कार भी शीतल हो जायेंगे।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

आप लोगों का स्लोगन है - मुक्ति और जीवन-मुक्ति हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। परमधाम में तो यह पता ही नहीं पड़ेगा कि मुक्ति क्या है, जीवन-मुक्ति क्या है, इसका अनुभव इस ब्राह्मण जीवन में अभी करना है।