12-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - यह कयामत का समय है, रावण ने सबको कब्रदाखिल कर दिया है, बाप आये हैं अमृत वर्षा कर साथ ले जाने''

प्रश्नः-
शिवबाबा को भोला भण्डारी भी कहा जाता है - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि शिव भोलानाथ जब आते हैं तो गणिकाओं, अहिल्याओं, कुब्जाओं का भी कल्याण कर उन्हें विश्व का मालिक बना देते हैं। आते भी देखो पतित दुनिया और पतित शरीर में हैं तो भोला हुआ ना। भोले बाप का डायरेक्शन है - मीठे बच्चे, अब अमृत पियो, विकारों रूपी विष को छोड़ दो।

गीत:-
दूरदेश का रहने वाला........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस अन्तिम जन्म में विष को त्याग अमृत पीना और पिलाना है। पावन बनना है। कांटों को फूल बनाने की सेवा करनी है।

2) विष्णु के गले की माला का दाना बनने के लिए बाप की याद में रहना है, पूरा-पूरा मददगार बन बाप समान दु:ख हर्ता बनना है।

वरदान:-
अपनी अलौकिक रूहानी वृत्ति द्वारा सर्व आत्माओं पर अपना प्रभाव डालने वाले मास्टर ज्ञान सूर्य भव

जैसे कोई आकर्षण करने वाली चीज़ आस-पास वालों को अपनी तरफ आकर्षित करती है, सभी का अटेन्शन जाता है। वैसे जब आपकी वृत्ति अलौकिक, रूहानियत वाली होगी तो आपका प्रभाव अनेक आत्माओं पर स्वत: पड़ेगा। अलौकिक वृत्ति अर्थात् न्यारे और प्यारे पन की स्थिति स्वत: अनेक आत्माओं को आकर्षित करती है। ऐसी अलौकिक शक्तिशाली आत्मायें मास्टर ज्ञान सूर्य बन अपना प्रकाश चारों ओर फैलाती हैं।

स्लोगन:-
सदा स्वमान की सीट पर स्थित रहो तो सर्व शक्तियां आपका आर्डर मानती रहेंगी।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

ज्ञानी बनने के साथ-साथ स्नेही बनो। स्व की सेवा विश्व सेवा का आधार है। सेवा में सिर्फ दो शब्द याद रखना - एक निमित्त हूँ, दूसरा निर्मान बनना ही है, इससे एकता का वातावरण बनेगा। एक दो के सहयोगी बनेंगे। तेरे मेरे की, मान-शान की, टकराव की भावनायें समाप्त हो जायेंगी।