12-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 30.11.2009 "बापदादा" मधुबन
बाप वा सर्व का प्रिय
बनने के लिए सन्तुष्टमणि बन हर परिस्थिति के प्रभाव से मुक्त रहो
वरदान:-
बाप के हाथ और
साथ की स्मृति से मुश्किल को सहज बनाने वाले बेफिक्र वा निश्चिंत भव
जैसे किसी बड़े के
हाथ में हाथ होता है तो स्थिति बेफिक्र वा निश्चिंत रहती है। ऐसे हर कर्म में यही
समझना चाहिए कि बापदादा मेरे साथ भी हैं और हमारे इस अलौकिक जीवन का हाथ उनके हाथ
में है अर्थात् जीवन उनके हवाले है, तो जिम्मेवारी भी उनकी हो जाती है। सभी बोझ बाप
के ऊपर रख अपने को हल्का कर दो। बोझ उतारने वा मुश्किल को सहज करने का साधन ही है -
बाप का हाथ और साथ।
स्लोगन:-
पुरुषार्थ में सच्चाई हो तो बापदादा की एकस्ट्रा मदद का अनुभव करेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
अगर आप से कोई टक्कर
लेता है तो आप उसे अपने स्नेह का पानी दो, आप अपने मधुरता और नम्रता के गुण को नहीं
छोड़ो। नम्रता की ड्रेस पहनकर रहो। यह नम्रता ही कवच है, जो सेफ्टी का साधन है।
संस्कारों की रास मिलाने का सबसे सहज तरीका है - स्वयं नम्रचित और मधुरता सम्पन्न
बन जाओ, दूसरे को श्रेष्ठ सीट दे दो।