12-06-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे सेन्सीबुल बच्चे - सदा याद रखो कि हम अविनाशी आत्मा हैं, हमें अब बाप के साथ पहले तबके (फ्लोर) में जाना है''

प्रश्नः-
कौन सी मेहनत तुम हर एक बच्चे को अवश्य करनी है?

उत्तर:-
बाबा तुम्हें जो इतनी नॉलेज देते हैं उसे अपनी दिल से लगाते रहो। अन्दर ही अन्दर उसको मनन कर हज़म करो, जिससे शक्ति मिलेगी। यह मेहनत अवश्य हर एक को करनी चाहिए। जो ऐसी गुप्त मेहनत करते हैं वह सदा हर्षित रहते हैं, उन्हें नशा रहता है कि हमें पढ़ाने वाला कौन है! हम किसके सामने बैठे हैं!

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अभी से ही बाप की श्रीमत पर ऐसे श्रेष्ठ कर्म करने हैं, जो फिर कभी कर्म कूटने न पड़े अर्थात् कर्मों की सज़ायें न खानी पड़े।

2) किसी भी विनाशी चीज़ का नशा नहीं रखना है। यह देह भी विनाशी है, इसका भी नशा नहीं रखना है, सेन्सीबुल बनना है।

वरदान:-
इस पुरानी दुनिया को विदेश समझ इससे उपराम रहने वाले स्वदेशी भव

जैसे कई लोग विदेश की चीज़ों को टच भी नहीं करते हैं, समझते हैं अपने देश की चीज़ का प्रयोग करें। ऐसे आप लोगों के लिए यह पुरानी दुनिया ही विदेश है, इससे उपराम रहो अर्थात् पुरानी दुनिया की जो चीज़े हैं, स्वभाव-संस्कार हैं उनकी तरफ जरा भी आकर्षित न हो। स्वदेशी बनो अर्थात् आत्मिक रूप में अपने ऊंचे देश परमधाम और इस ईश्वरीय परिवार के हिसाब से मधुबन देश के निवासी समझ, इसके नशे में रहो।

स्लोगन:-
झमेलों में फंसने के बजाए सदा मिलन मेले में रहो।

ये अव्यक्त इशारे - सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।

होलीहंस की विशेषता - सरल-चित, सरल वाणी, सरल वृत्ति, सरल दृष्टि। बापदादा को सबसे प्रिय, सबसे समीप साफ दिल वाले प्यारे हैं। साफ दिल सदा बापदादा के दिलतख्त नशीन, सर्व श्रेष्ठ संकल्प पूर्ण होने के कारण वृत्ति में, दृष्टि में, बोल में, सम्बन्ध-सम्पर्क में सरल और स्पष्ट एक समान दिखाई देते हैं।