12-08-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हें सर्विस की बहुत उछल आनी चाहिए, ज्ञान और योग है तो दूसरों को भी सिखाओ, सर्विस की वृद्धि करो''

प्रश्नः-
सर्विस में उछल न आने का कारण क्या है? किस विघ्न के कारण उछल नहीं आती?

उत्तर:-
सबसे बड़ा विघ्न है क्रिमिनल आई। यह बीमारी सर्विस में उछलने नहीं देती। यह बहुत कड़ी बीमारी है। अगर क्रिमिनल आई ठण्डी नहीं हुई है, गृहस्थ व्यवहार में दोनों पहिये ठीक नहीं चलते तो गृहस्थी का बोझ हो जाता, फिर हल्के हो सर्विस में उछल नहीं सकते।

गीत:-
जाग सजनियाँ जाग ........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) याद की गुप्त मेहनत करनी है। याद की मस्ती में रहने से सर्विस स्वत: ही बढ़ती रहेगी। मन्सा-वाचा-कर्मणा याद में रहने का पुरुषार्थ करना है।

2) मुख से ज्ञान की ही बातें सुनानी है, किसको दु:ख नहीं देना है। कोई भी अकर्तव्य नहीं करना है। देही-अभिमानी बनने की मेहनत करनी है।

वरदान:-
लोहे समान आत्मा को पारस बनाने वाले मास्टर पारसनाथ भव

आप सब पारसनाथ बाप के बच्चे मास्टर पारसनाथ हो - तो कैसी भी लोहे समान आत्मा हो लेकिन आप के संग से लोहा भी पारस बन जाए। यह लोहा है - ऐसा कभी नहीं सोचना। पारस का काम ही है लोहे को पारस बनाना। यही लक्ष्य और लक्षण सदा स्मृति में रख हर संकल्प, हर कर्म करना, तब अनुभव होगा कि मुझ आत्मा के लाइट की किरणें अनेक आत्माओं को गोल्डन बनाने की शक्ति दे रही हैं।

स्लोगन:-
हर कार्य साहस से करो तो सर्व का सम्मान प्राप्त होगा।

अव्यक्त इशारे - सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो

परमात्म प्यार इस श्रेष्ठ ब्राह्मण जन्म का आधार है। कहते भी हैं प्यार है तो जहान है, जान है। प्यार नहीं तो बेजान, बेजहान हैं। प्यार मिला अर्थात् जहान मिला। दुनिया एक बूँद की प्यासी है और आप बच्चों का यह प्रभु प्यार प्रापर्टी है। इसी प्रभु प्यार से पलते हो अर्थात् ब्राह्मण जीवन में आगे बढ़ते हो। तो सदा प्यार के सागर में लवलीन रहो।