13-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - यहाँ तुम्हारा सब कुछ गुप्त है, इसलिए तुम्हें कोई भी ठाठ नहीं करना है, अपनी नई राजधानी के नशे में रहना है''

प्रश्नः-
श्रेष्ठ धर्म और दैवी कर्म की स्थापना के लिए तुम बच्चे कौन सी मेहनत करते हो?

उत्तर:-
तुम अभी 5 विकारों को छोड़ने की मेहनत करते हो, क्योंकि इन विकारों ने ही सबको भ्रष्ट बनाया है। तुम जानते हो इस समय सभी दैवी धर्म और कर्म से भ्रष्ट हैं। बाप ही श्रीमत देकर श्रेष्ठ धर्म और श्रेष्ठ दैवी कर्म की स्थापना करते हैं। तुम श्रीमत पर चल बाप की याद से विकारों पर विजय पाते हो। पढ़ाई से अपने आपको राजतिलक देते हो।

गीत:-
तुम्हें पाके........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा यह स्मृति रखनी है कि हम एक मत, एक राज्य, एक धर्म की स्थापना के निमित्त हैं इसलिए एक मत होकर रहना है।

2) स्वयं को राजाई का तिलक देने के लिए विकारों को छोड़ने की मेहनत करनी है। पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना है।

वरदान:-
कर्मातीत स्टेज पर स्थित हो चारों ओर की सेवाओं को हैण्डल करने वाले सिद्धि स्वरूप भव

आगे चलकर चारों ओर की सेवाओं के विस्तार को हैण्डल करने के लिए भिन्न-भिन्न साधन अपनाने पड़ेंगे क्योंकि उस समय पत्र व्यवहार या टेलीग्राम, टेलीफोन आदि काम नहीं करेंगे। ऐसे समय पर वायरलेस सेट चाहिए। इसके लिए अभी-अभी कमयोगी, अभी-अभी कर्मातीत स्टेज में स्थित रहने का अभ्यास करो। तब चारों ओर संकल्प की सिद्धि द्वारा सेवा में सहयोगी बन सकेंगे।

स्लोगन:-
परमात्म प्यार की पालना का स्वरूप - आपकी सहजयोगी जीवन है।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

हर एक को दो बातें विशेष ध्यान में रखनी हैं - एक सदा संस्कारों को मिलाने की यूनिटी। दूसरा एक दो में विश्वास रख सदा सन्तुष्ट रहना है और सबको सन्तुष्ट करना है। जब यह दोनों बातें सदा ध्यान पर रहेंगी तब बाप जो है जैसा है, वैसा दिखाई देगा और प्रत्यक्षता होगी।