13-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अभी तुम ऐसी
दुनिया के मालिक बनते हो जहाँ कोई हद नहीं, योगबल से सारे विश्व की राजाई लेना यह
भी वन्डर है''
प्रश्नः-
ड्रामा के किस
बन्धन में बाप भी बंधा हुआ है?
उत्तर:-
बाबा कहते,
मुझे तुम बच्चों के सम्मुख आना ही है, मैं इस बन्धन में बंधा हुआ हूँ। जब तक मैं न
आऊं तब तक मूँझा हुआ सूत सुलझ नहीं सकता। बाकी मैं तुम्हारे पर कोई कृपा वा
आशीर्वाद करने नहीं आता हूँ। मैं कोई मरे हुए को जिंदा नहीं करता। मैं तो आता हूँ,
तुम्हें पतित से पावन बनाने।
गीत:-
तुम्हें पाके
हमने.....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से सीधा और सच्चा होकर चलना है। कल्याणकारी बाप के बच्चे हैं
इसलिए सर्व का कल्याण करना है। सपूत बनना है।
2) कर्म करते भी कम से कम 8 घण्टा याद में जरूर रहना है। याद ही मुख्य है - इससे
ही विकर्मों का बोझ उतारना है।
वरदान:-
दाता बन हर
सेकण्ड, हर संकल्प में दान देने वाले उदारचित, महादानी भव
आप दाता के बच्चे लेने वाले
नहीं लेकिन देने वाले हो। हर सेकण्ड हर संकल्प में देना है, जब ऐसे दाता बन जायेंगे
तब कहेंगे उदारचित, महादानी। ऐसे महादानी बनने से महान् शक्ति की प्राप्ति स्वत:
होती है। लेकिन देने के लिए स्वयं का भण्डारा भरपूर चाहिए। जो लेना था वह सब कुछ ले
लिया, बाकी रह गया देना। तो देते जाओ देने से और भी भण्डारा भरता जायेगा।
स्लोगन:-
हर
सबजेक्ट में फुल मार्क्स जमा करनी है तो गम्भीरता का गुण धारण करो।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
नम्रचित आत्मा सहज
ही सुखदाता बन सकती है लेकिन अभिमान नम्रचित बनने नहीं देता। नम्रचित नहीं तो सेवा
हो नहीं सकती। सेवाधारी की विशेषता सदा नम्रचित, स्वयं झुका हुआ होगा तब औरों को
झुका सकेगा। जितना नम्रचित होंगे उतना निर्माण करेंगे। जहाँ निर्मानता होगी वहाँ
रोब नहीं होगा, रूहानियत होगी। जैसे बाप कितना नम्रचित बनकर आते हैं, ऐसे फालो फादर।