13-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप आये हैं सारी दुनिया से विकारों की तपत
बुझाए सबको शीतल बनाने, ज्ञान बरसात शीतल बना देती है''
प्रश्नः-
कौन सी तपत
सारी दुनिया को जला रही है?
उत्तर:-
काम विकार की
तपत सारी दुनिया को जला रही है। सब काम अग्नि में जलकर काले हो गये हैं। बाप ज्ञान
वर्षा से उन्हें शीतल बनाते हैं। जैसे बरसात पड़ने से धरती शीतल हो जाती है तो इस
ज्ञान वर्षा से 21 जन्मों के लिए तुम शीतल बन जाते हो। किसी भी प्रकार की तपत नहीं
रहती। तत्व भी सतोप्रधान बन जाते हैं। कोई भी तपते नहीं हैं।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
रूहानी पढ़ाई के नशे में रहना है। बाप समान निरहंकारी बनना है। पोजीशन आदि का
अहंकार नहीं रखना है।
2) अपनी झोली ज्ञान
रत्नों से भरनी है। सम्पूर्ण निर्विकारी बन देवता पद पाना है। कभी भी मुरझाना नहीं
है।
वरदान:-
स्थूल और
सूक्ष्म दोनों रीति से स्वयं को बिजी रखने वाले मायाजीत, विजयी भव
स्वयं को सेवाधारी
समझ अपनी रुची, उमंग से सेवा में बिजी रहो तो माया को चांस नहीं मिलेगा। जब संकल्प
से, बुद्धि से, चाहे स्थूल कर्मणा से फ्री रहते हो तो माया चांस ले लेती है। लेकिन
स्थूल और सूक्ष्म दोनों ही रीति से खुशी-खुशी से सेवा में बिजी रहो तो खुशी के कारण
माया सामना करने का साहस नहीं रख सकती इसलिए स्वयं ही टीचर बन बुद्धि को बिजी रखने
का डेली प्रोग्राम बनाओ तो मायाजीत, विजयी बन जायेंगे।
स्लोगन:-
निश्चय और फलक
से कहो बाबा मेरे साथ है तो माया समीप आ नहीं सकती।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
बापदादा सभी बच्चों
के चलन और चेहरे में, बोल व कर्म में सरलता और मधुरता देखने चाहते हैं। अगर आवेशता
या थकावट के कारण थोड़ा भी बोल मधुर नहीं है, चेहरा मधुर नहीं है, सीरियस है तो गुण
सम्पन्न नहीं कहेंगे। कैसे भी सरकमस्टॉन्स हो लेकिन मेरा जो गुण है, वह मेरा गुण
इमर्ज होना चाहिए। जैसे बापदादा वैसे हूबहू वही गुण, वही कर्तव्य, वही बोल, वही
संकल्प अनुभव हो, सभी के मुख से निकले यह तो वही लगते हैं।