13-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अकाल मूर्त
बाप का बोलता-चलता तख्त यह (ब्रह्मा) है, जब वह ब्रह्मा में आते हैं तब तुम
ब्राह्मणों को रचते हैं''
प्रश्नः-
अक्लमंद बच्चे
किस राज़ को समझकर ठीक रीति से समझा सकते हैं?
उत्तर:-
ब्रह्मा कौन
है और वह ब्रह्मा सो विष्णु कैसे बनते हैं। प्रजापिता ब्रह्मा यहाँ है, वह कोई देवता
नहीं। ब्रह्मा ने ही ब्राह्मणों द्वारा ज्ञान यज्ञ रचा है.... यह सब राज़ अक्लमंद
बच्चे ही समझकर समझा सकते हैं। घोड़ेसवार और प्यादे तो इसमें मूँझ जायेंगे।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस ड्रामा की हर सीन को साक्षी होकर देखना है, एक बाप की याद में
मस्त रहना है। याद की यात्रा में कभी उमंग कम न हो।
2) पढ़ाई में कभी ग़फलत नहीं करना, अपनी ऊंच तकदीर बनाने के लिए पवित्र जरूर बनना
है। हार खाकर जन्म-जन्मान्तर के लिए पद भ्रष्ट नहीं करना है।
वरदान:-
सच्ची सेवा
द्वारा अविनाशी, अलौकिक खुशी के सागर में लहराने वाली खुशनसीब आत्मा भव
जो बच्चे सेवाओं में
बापदादा और निमित्त बड़ों के स्नेह की दुआयें प्राप्त करते हैं उन्हें अन्दर से
अलौकिक, आत्मिक खुशी का अनुभव होता है। वे सेवाओं द्वारा आन्तरिक खुशी, रूहानी मौज,
बेहद की प्राप्ति का अनुभव करते हुए सदा खुशी के सागर में लहराते रहते हैं। सच्ची
सेवा सर्व का स्नेह, सर्व द्वारा अविनाशी सम्मान और खुशी की दुआयें प्राप्त होने की
खुशनसीबी के श्रेष्ठ भाग्य का अनुभव कराती है। जो सदा खुश हैं वही खुशनसीब हैं।
स्लोगन:-
सदा
हर्षित व आकर्षण मूर्त बनने के लिए सन्तुष्टमणी बनो।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
कर्म में, वाणी
में, सम्पर्क व सम्बन्ध में लव और स्मृति व स्थिति में लवलीन रहना है, जो जितना लवली
होगा, वह उतना ही लवलीन रह सकता है। इस लवलीन स्थिति को मनुष्यात्माओं ने लीन की
अवस्था कह दिया है। बाप में लव खत्म करके सिर्फ लीन शब्द को पकड़ लिया है। आप बच्चे
बाप के लव में लवलीन रहेंगे तो औरों को भी सहज आप-समान व बाप-समान बना सकेंगे।