14-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“ मीठे बच्चे - तुम सर्वोत्तम सौभाग्यशाली ब्राह्मण कुल भूषण हो , तुम्हें स्वयं भगवान बधाइयां देते हैं ''

प्रश्नः-
बाप बच्चों को संगम पर ही सृष्टि का समाचार सुनाते हैं, सतयुग में नहीं, क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि सतयुग तो है ही आदि का समय, उस समय सारी सृष्टि का समाचार अर्थात् सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान कैसे सुनायें, जब तक सर्किल रिपीट ही नहीं हुआ है तब तक समाचार सुना ही कैसे सकते। संगम पर ही तुम बच्चे बाप द्वारा पूरा समाचार सुनते हो। तुम्हें ही ज्ञान का तीसरा नेत्र मिलता है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) देवताओं से भी ऊंच हम सर्वोत्तम ब्राह्मण हैं - इस रूहानी नशे में रहना है। ज्ञान और योग से आत्मा को स्वच्छ बनाना है।

2) सबको शिवबाबा के अवतरण की बधाईयाँ देनी हैं। बाप का परिचय देकर पतित से पावन बनाना है। रावण दुश्मन से मुक्त करना है।

वरदान:-
विस्तार की रंग - बिरंगी बातों से किनारा कर मुश्किल को सहज बनाने वाले सहजयोगी भव

जब बाप को देखने के बजाए बातों को देखने लग जाते हो तो कई क्वेश्चन उत्पन्न होते हैं और सहज बात भी मुश्किल अनुभव होने लगती है क्योंकि बातें हैं वृक्ष और बाप है बीज। जो विस्तार वाले वृक्ष को हाथ में उठाते हैं वह बाप को किनारे कर देते हैं, फिर विस्तार एक जाल बन जाता है जिसमें फंसते जाते हैं। बातों के विस्तार में रंग-बिरंगी बातें होती हैं जो अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं, इसलिए बीजरूप बाप की याद से बिन्दी लगाकर उससे किनारा कर लो तो सहज योगी बन जायेंगे।

स्लोगन:-
मैं और मेरे पन की अलाय को समाप्त करना ही रीयल गोल्ड बनना है।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

अभी सभी मिलकर एकमत हो सेवा के कोई भी कार्य को धूमधाम से आगे बढ़ाओ। हर ब्राह्मण आत्मा के सहयोग से, शुभ कामनाओं, शुभ भावनाओं से सेवाओं की धूम मचाओ। अगर कोई मुख से बोल नहीं सकते तो मन्सा वायुमण्डल से सुख की वृत्ति, सुखमय स्थिति से सुखमय संसार बनाये। कहाँ जा नहीं सकते हो, तबियत ठीक नहीं है तो घर बैठे यह सेवा करो, सेवा में सहयोगी जरूर बनो तब सर्व के सहयोग से सुखमय संसार बनेगा।