14-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 24.10.2010 "बापदादा" मधुबन
समय की रफ्तार प्रमाण
अभी विशेष स्वभाव-संस्कार परिवर्तन करने में तीव्रता लाओ, मन्सा द्वारा आत्माओं को
भिन्न-भिन्न किरणें दो
वरदान:-
साधारणता
द्वारा महानता को प्रसिद्ध करने वाले सिम्पल और सैम्पुल भव
जैसे कोई सिम्पल चीज़
अगर स्वच्छ होती है तो अपने तरफ आकर्षित जरूर करती है। ऐसे मन्सा के संकल्पों में,
सम्बन्ध में, व्यवहार में, रहन सहन में जो सिम्पल और स्वच्छ रहते हैं वह सैम्पल बन
सर्व को अपनी तरफ स्वत: आकर्षित करते हैं। सिम्पल अर्थात् साधारण। साधारणता से ही
महानता प्रसिद्ध होती है। जो साधारण अर्थात् सिम्पल नहीं वह प्राब्लम रूप बन जाते
हैं।
स्लोगन:-
दिल से कहो मेरा बाबा तो माया की बेहोशी से बंद आंखे खुल जायेंगी।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
अभी-अभी आवाज में,
अभी-अभी आवाज़ से परे, जितना यह अभ्यास सरल और सहज हो जायेगा उतना सम्पूर्णता समीप
दिखाई देगी। सम्पूर्ण स्टेज की निशानी है - उनका पुरुषार्थ सरल होगा। याद की यात्रा,
सर्विस दोनों ही सहज पुरुषार्थ में आ जाते हैं। जब दोनों में सरल, सहज अनुभव हो तब
समझो सम्पूर्णता की अवस्था प्राप्त होने वाली है।