14-08-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप से
ऑनेस्ट रहो, अपना सच्चा-सच्चा चार्ट रखो, किसी को भी दु:ख न दो, एक बाप की श्रेष्ठ
मत पर चलते रहो''
प्रश्नः-
जो पूरे 84
जन्म लेने वाले है, उनका पुरुषार्थ क्या होगा?
उत्तर:-
उनका विशेष
पुरुषार्थ नर से नारायण बनने का होगा। अपनी कर्मेन्द्रियों पर उनका पूरा कन्ट्रोल
होगा। उनकी आंखें क्रिमिनल नहीं होगी। अगर अब तक भी किसी को देखने से विकारी
ख्यालात आते हैं, क्रिमिनल आई होती है तो समझो पूरे 84 जन्म लेने वाली आत्मा नहीं
है।
गीत:-
इस पाप की
दुनिया से........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं का बोझ हल्का करने के लिए जो भी विकर्म हुए हैं, वह बाप को
लिखकर देना है। अब किसी को भी दु:ख नहीं देना है। सपूत बनकर रहना है।
2) अपनी दृष्टि बहुत अच्छी बनानी है। आंखें धोखा न दें - इसकी सम्भाल करनी है।
अपने मैनर्स बहुत-बहुत अच्छे रखने हैं। काम-क्रोध के वश हो कोई पाप नहीं करने हैं।
वरदान:-
लक्ष्य और
मंजिल को सदा स्मृति में रख तीव्र पुरुषार्थ करने वाले सदा होली और हैपी भव
ब्राह्मण जीवन का लक्ष्य
है बिना कोई हद के आधार के सदा आन्तरिक खुशी में रहना। जब यह लक्ष्य बदल हद की
प्राप्तियों की छोटी-छोटी गलियों में फंस जाते हो तब मंजिल से दूर हो जाते हो।
इसलिए कुछ भी हो जाए, हद की प्राप्तियों का त्याग भी करना पड़े तो उन्हें छोड़ दो
लेकिन अविनाशी खुशी को कभी नहीं छोड़ो। होली और हैपी भव के वरदान को स्मृति में रख
तीव्र पुरुषार्थ द्वारा अविनाशी प्राप्तियां करो।
स्लोगन:-
गुण
मूर्त बनकर गुणों का दान देते चलो - यही सबसे बड़ी सेवा है।
अव्यक्त इशारे -
सहजयोगी बनना है तो परमात्म प्यार के अनुभवी बनो
मास्टर नॉलेजफुल,
मास्टर सर्वशक्तिवान की स्टेज पर स्थित रह भिन्न-भिन्न प्रपार की क्यू से निकल, बाप
के साथ सदा मिलन मनाने की लगन में अपने समय को लगाओ और लवलीन स्थिति में रहो तो और
सब बातें सहज समाप्त हो जायेंगी, फिर आपके सामने आपकी प्रजा और भक्तों की क्यू लगेगी।