14-10-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप को याद करने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ रचो, पुरुषार्थ कर चार्ट रखो, थको नहीं, तूफानों में अडोल रहो''

प्रश्नः-
बच्चों को अपना कौन सा अनुभव आपस में एक दो को सुनाना चाहिए?

उत्तर:-
हम बाप को कितना समय और कैसे याद करते हैं! भोजन के समय बाप की याद रहती है या अनेक प्रकार के विचार आ जाते हैं! बाबा कहते बच्चे ट्राई करके देखो। भोजन पर बाप के सिवाए दूसरा कुछ याद तो नहीं आता है! फिर आपस में एक दो को अनुभव सुनाओ। 2- कोई भी दर्दनाक सीन देखते हमारी स्थिति कैसी रही! इसका भी अनुभव सुनाना चाहिए।

गीत:-
लाख जमाने वाले....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सूर्यवंशी बनने के लिए मात-पिता को पूरा-पूरा फालो करना है। याद में रहने की और आप समान बनाने की मेहनत करनी है।

2) पुरुषार्थ कर श्रीमत पर चल शान्त रहना है। बड़ों की आज्ञा माननी है।

वरदान:-
एक बल एक भरोसे के आधार पर मंजिल को समीप अनुभव करने वाले हिम्मतवान भव

ऊंची मंजिल पर पहुंचने से पहले आंधी तूफान लगते ही हैं, स्टीमर को पार जाने के लिए बीच भंवर से क्रास करना ही पड़ता है इसलिए जल्दी में घबराओ मत, थको वा रूको मत। साथी को साथ रखो तो हर मुश्किल सहज हो जायेगी, हिम्मतवान बन बाप की मदद के पात्र बनो। एक बल एक भरोसा - इस पाठ को सदा पक्का रखो तो बीच भंवर से सहज निकल आयेंगे और मंजिल समीप अनुभव होगी।

स्लोगन:-
विश्व कल्याणकारी वह है जो प्रकृति सहित हर आत्मा के प्रति शुभ भावना रखते हैं।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

हर आत्मा के प्रति रहम की भावना, सदा सहयोग की भावना, हिम्मत बढ़ाने की भावना हो। हर परिस्थिति में, हर कार्य में, हर सहयोगी संगठन में नि:स्वार्थ पन हो, तब कहेंगे पर उपकार की भावना। जैसे ब्रह्मा बाप ने स्व के प्रति कुछ भी स्वीकार नहीं किया। न महिमा स्वीकार की, न वस्तु स्वीकार की, न रहने का स्थान स्वीकार किया। स्थूल और सूक्ष्म सदा “पहले बच्चे'', इसको कहते हैं पर-उपकारी, इसमें फालो फादर कर समान बनो।