15-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 24.03.2009 "बापदादा" मधुबन
बापदादा द्वारा मिले
हुए खजानों को स्वयं में समाकर कार्य में लगाओ, अनुभव की अथॉरिटी बनो
वरदान:-
मास्टर
त्रिकालदर्शी बन हर कर्म युक्तियुक्त करने वाले कर्मबन्धन मुक्त भव
जो भी संकल्प, बोल वा
कर्म करते हो - वह मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर करो तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा अनर्थ नहीं
हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर, कर्मों की गुह्य
गति को जान-कर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराओ तो कभी भी कर्म के बन्धन में नहीं
बंधेंगे। हर कर्म करते कर्मबन्धन मुक्त, कर्मातीत स्थिति का अनुभव करते रहेंगे।
स्लोगन:-
जिनके पास हद के इच्छाओं की अविद्या है वही महान सम्पत्तिवान हैं।
ये अव्यक्त इशारे-
“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
जैसे पहरे वाला
चौकीदार अगर शस्त्रधारी होता है और उसको निश्चय है कि मेरा शस्त्र दुश्मन को भगाने
वाला है, हार खिलाने वाला है तो वह कितना निर्भय हो करके चलता रहता है। तो आप के
पास भी सर्व शक्तियों रूपी शस्त्र सदा साथ हैं, सिर्फ आवाह्न करो अर्थात् मालिक बन
आर्डर करो तो सफलता सदा हुई पड़ी है।