15-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारा
स्वधर्म शान्त है, सच्ची शान्ति शान्तिधाम में मिल सकती है, यह बात सबको सुनानी है,
स्वधर्म में रहना है''
प्रश्नः-
कौन सी नॉलेज
एक बाप के पास है जो अभी ही तुम पढ़ते हो?
उत्तर:-
पाप और पुण्य
की नॉलेज। भारतवासी जब बाप को गाली देने लगते हैं, तब पाप आत्मा बनते और जब बाप को
और ड्रामा को जान लेते हैं, तब पुण्य आत्मा बन जाते हैं। यह पढ़ाई तुम बच्चे अभी ही
पढ़ते हो। तुम जानते हो सबको सद्गति देने वाला एक ही बाप है। मनुष्य, मनुष्य को
सद्गति अर्थात् मुक्ति-जीवनमुक्ति दे नहीं सकते।
गीत:-
इस पाप की
दुनिया से ....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से जीवनमुक्ति का वर्सा लेने के लिए पावन जरूर बनना है। ड्रामा
की नॉलेज को बुद्धि में रख दु:खधाम में रहते भी दु:खों से मुक्त होना है।
2) धन-माल वा साहूकारी का नशा छोड़ देही-अभिमानी रहने का पुरुषार्थ करना है।
वरदान:-
विकारों के
वंश के अंश को भी समाप्त करने वाले सर्व समर्पण वा ट्रस्टी भव
जो आईवेल के लिए पुराने
संस्कारों की प्रापर्टी किनारे कर रख लेते हैं। तो माया किसी न किसी रीति से पकड़
लेती है। पुराने रजिस्टर की छोटी सी टुकड़ी से भी पकड़ जायेंगे, माया बड़ी तेज है,
उनकी कैचिंग पावर कोई कम नहीं है इसलिए विकारों के वंश के अंश को भी समाप्त करो। जरा
भी किसी कोने में पुराने खजाने की निशानी न हो - इसको कहा जाता है सर्व समर्पण,
ट्रस्टी वा यज्ञ के स्नेही सहयोगी।
स्लोगन:-
किसी
की विशेषता के कारण उससे विशेष स्नेह हो जाना - ये भी लगाव है।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
मधुरता ही महानता
है, इससे मन और मुख का कडुवापन समाप्त हो जाता है। क्रोध अग्नि शीतल हो जाती है।
बापदादा अपने हर बच्चे को शीतल देवता बनाना चाहते हैं इसलिए मधुरता के गुण को धारण
करो। आपका मुखड़ा भी मीठा हो। मधुरता के गुण से भरपूर बनो, जो भी सम्पर्क में आये
उसे मधुर बोल वा शक्तिशाली दृष्टि से भरपूर करो।