15-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अमर बाबा आया है तुम्हें ज्ञान का तीसरा
नेत्र देने, अभी तुम तीनों कालों और तीनों लोकों को जानते हो''
प्रश्नः-
रूहानी बाप
रूहों को वर्सा किस आधार पर देते हैं?
उत्तर:-
पढ़ाई के आधार
पर। जो बच्चे अच्छी रीति पढ़ते हैं देह-अभिमान को छोड़ देही-अभिमानी रहने का
पुरुषार्थ करते हैं, उन्हें ही बाप का वर्सा मिलता है। लौकिक बाप सिर्फ बच्चों को
वर्सा देते लेकिन पारलौकिक बाप का सम्बन्ध रूहों से है, इसलिए रूहों को वर्सा देते
हैं।
गीत:-
भोलेनाथ से
निराला...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
स्वयं को रूह समझ, रूहानी बाप से पढ़कर पूरा वर्सा लेना है। सचखण्ड का मालिक बनने
के लिए सच्ची कथा सुननी और सुनानी है।
2) जिस बाप से बेहद
का वर्सा मिलता है, उसे ही याद करना है। किसी देहधारी को नहीं। इस पुरानी दुनिया को
आग लगनी है इसलिए इसे देखते भी नहीं देखना है।
वरदान:-
साइलेन्स की
शक्ति द्वारा अपने रजिस्टर को साफ करने वाले लोकप्रिय, प्रभू प्रिय भव
जैसे साइन्स ने ऐसी
इन्वेन्शन की है जो लिखा हुआ सब मिट जाए, मालूम न पड़े। ऐसे आप साइलेन्स की शक्ति
से अपने रजिस्टर को रोज़ साफ करो तो प्रभू प्रिय वा दैवी लोक प्रिय बन जायेंगे।
सच्चाई सफाई को सभी पसन्द करते हैं इसलिए एक दिन के किये हुए व्यर्थ संकल्प वा
व्यर्थ कर्म की दूसरे दिन लीक भी न रहे, बीती को बीती कर फुलस्टाप लगा दो तो
रजिस्टर साफ रहेगा और साहेब राज़ी हो जायेगा।
स्लोगन:-
व्यर्थ संकल्प
करना वा दूसरों के व्यर्थ संकल्प चलाने के निमित्त बनना - यह भी अपवित्रता है।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
मन, वाणी, कर्म में
सरलता और सहनशीलता यह दोनों आवश्यक हैं। अगर सरलता है, सहनशीलता नहीं तो भी श्रेष्ठ
नहीं। सरलता के साथ सहनशीलता है तो शक्ति स्वरुप कहा जाता है। शक्तियों के चित्रों
में सरलता और सहनशीलता दोनों ही गुण दिखाते हैं। अभी की रिजल्ट में कहाँ सहनशीलता
अधिक है, कहाँ सरलता अधिक है। अब इन दोनों को समान बनाओ।