15-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सबको यही पैगाम दो कि देह सहित देह के सब
धर्मों को भूल अपने को आत्मा समझो तो सब दु:ख दूर हो जायेंगे''
प्रश्नः-
तुम बच्चों को
किस बात में फालो फादर करना है?
उत्तर:-
जैसे इस
ब्रह्मा ने अपना सब कुछ ईश्वर अर्पण कर दिया। पूरा ट्रस्टी बना, ऐसे ट्रस्टी बनकर
रहो। कभी भी उल्टा-सुल्टा खर्चा कर पाप आत्माओं को नहीं देना। अपना सब कुछ ईश्वरीय
सेवा में लगाओ, पूरा ट्रस्टी बनो। बाप की श्रीमत पर चलते रहो। बाप देखते हैं कौन
बच्चा कितना श्रीमत पर चलता है।
गीत:-
तू प्यार का
सागर है....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जब तक जीना है ज्ञान अमृत पीते रहना है। महावीर बन माया की बॉक्सिंग में विजयी बनना
है। सबके साथ तोड़ निभाते दिल एक बाप में रखनी है।
2) विघ्नों से डरना
नहीं है। सर्विस में अपना सब कुछ सफल करना है। ईश्वर अर्पण कर ट्रस्टी बन रहना है।
कुछ भी उल्टे सुल्टे कार्य में नहीं लगाना है।
वरदान:-
अपने सम्पूर्ण
स्वरूप के आह्वान द्वारा आवागमन के चक्र से छूटने वाले लक्की सितारे भव
अब अपनी सम्पूर्ण
स्थिति व सम्पूर्ण स्वरूप का आह्वान करो तो वही स्वरूप सदा स्मृति में रहेगा फिर जो
कभी ऊंची स्थिति, कभी नीची स्थिति में आने-जाने का (आवागमन का) चक्र चलता है,
बार-बार स्मृति और विस्मृति के चक्र में आते हो, इस चक्र से मुक्त हो जायेंगे। वे
लोग जन्म-मरण के चक्र से छूटने चाहते हैं और आप लोग व्यर्थ बातों से छूट चमकते हुए
लक्की सितारे बन जाते हो।
स्लोगन:-
किसी भी विघ्न
के वश होना अर्थात् डायमण्ड पर दाग लगाना।
ये अव्यक्त इशारे -
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
जैसे आपका आदि स्वरूप
पवित्र देवता है, ऐसे यह अन्तिम जन्म भी पवित्र ब्राह्मण जीवन है, इस स्मृति के
आधार पर पवित्र जीवन अति सहज अनुभव करो। पवित्र बनो, योगी बनो - यही महामन्त्र सर्व
प्राप्तियों की चाबी है। अगर पवित्रता नहीं, योगी जीवन नहीं तो अधिकारी होते हुए भी
अधिकार की अनुभूति नहीं कर सकेंगे। यह महामन्त्र ही सर्व खजानों के अनुभूति की चाबी
है।