16-02-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - प्राणेश्वर बाप आया है तुम बच्चों को प्राणदान देने, प्राणदान मिलना अर्थात् तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना''

प्रश्नः-
ड्रामा के हर राज़ को जानने के कारण कौन-सी सीन तुम्हारे लिए नई नहीं है?

उत्तर:-
इस समय जो सारी दुनिया में हंगामें हैं, विनाश काले विपरीत बुद्धि बन अपने ही कुल का खून करने लिए अनेक साधन बनाते जाते हैं। यह कोई नई बात नहीं क्योंकि तुम जानते हो यह दुनिया तो बदलनी ही है। महाभारत लड़ाई के बाद ही हमारी नई दुनिया आयेगी।

गीत:-
यह कौन आज आया.......

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) यह पुरानी दुनिया विनाश हुई पड़ी है इसलिए इससे अपने आपको अलग समझना है। झाड़ की वृद्धि के साथ-साथ जो विघ्नों रूपी तूफान आते हैं, उनसे डरना नहीं है, पार होना है।

2) आत्मा को सतोप्रधान बनाने के लिए अपने को ज्ञान-योग का इन्जेक्शन देना है। अपना बुद्धियोग स्वीट होम में लगाना है।

वरदान:-
“पहले आप'' के पाठ द्वारा ताजधारी बनने वाले चतुरसुजान भव

जैसे बापदादा अपने को ओबीडियन्ट सर्वेन्ट कहते हैं, सर्वेन्ट कहने से ताजधानी स्वत: बन जाते हैं, ऐसे आप बच्चे भी स्वयं नम्रचित बन दूसरे को श्रेष्ठ सीट दे दो, उनको सीट पर बिठायेंगे तो वह उतरकर आपको स्वत: ही बिठा देगा। अगर आप बैठने की कोशिश करेंगे तो वह बैठने नहीं देगा इसलिए बिठाना ही बैठना है। तो “पहले आप'' का पाठ पक्का करो फिर संस्कार भी सहज ही मिल जायेंगे, ताजधारी भी बन जायेंगे, यही चतुरसुजान बनने का तरीका है, इसमें मेहनत भी नहीं प्राप्ति भी ज्यादा है।

स्लोगन:-
अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए अन्तर्मुखी, एकान्तवासी बनो।

ये अव्यक्त इशारे - एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो

अभी तक अलग-अलग फूल अपनी-अपनी रंगत दिखा रहे हैं लेकिन जब गुलदस्ते के रूप में अपनी खुशबू फैलायेंगे, शक्ति दल प्रत्यक्ष होगा तब यह संगठन की शक्ति परमात्म प्रत्यक्षता के निमित्त बनेंगी। अभी एक-एक अलग होने के कारण मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है लेकिन जब संगठन एकमत होगा तो मेहनत कम सफलता जास्ती होगी।