16-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हें
सद्गति की सबसे न्यारी मत मिली है कि देह के सब धर्म त्याग आत्म अभिमानी भव, मामेकम्
याद करो''
प्रश्नः-
जो परमात्मा
को नाम रूप से न्यारा कहते हैं, उनसे तुम कौन सा प्रश्न पूछ सकते हो?
उत्तर:-
उनसे पूछो -
गीता में जो दिखाते हैं अर्जुन को अखण्ड ज्योति स्वरूप का साक्षात्कार हुआ, बोला बस
करो हम सहन नहीं कर सकते। तो फिर नाम रूप से न्यारा कैसे कहते हो। बाबा कहते हैं
मैं तो तुम्हारा बाप हूँ। बाप का रूप देखकर बच्चा खुश होगा, वह कैसे कहेगा मैं सहन
नहीं कर सकता।
गीत:-
तेरे द्वार खड़ा...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मास्टर ज्ञान सागर बन पतित से पावन बनाने की सेवा करनी है। बाप ने जो
सब शास्त्रों का सार सुनाया है वह बुद्धि में रख सदा हर्षित रहना है।
2) एक बाप की श्रीमत हर पल पालन करना है। देह के सब धर्म त्याग आत्म-अभिमानी बनने
की मेहनत करनी है।
वरदान:-
विस्तार को
सार में समाकर अपनी श्रेष्ठ स्थिति बनाने वाले बाप समान लाइट माइट हाउस भव
बाप समान लाइट, माइट हाउस
बनने के लिए कोई भी बात देखते वा सुनते हो तो उसके सार को जानकर एक सेकण्ड में समा
देने वा परिवर्तन करने का अभ्यास करो। क्यों, क्या के विस्तार में नहीं जाओ क्योंकि
किसी भी बात के विस्तार में जाने से समय और शक्तियां व्यर्थ जाती हैं। तो विस्तार
को समाकर सार में स्थित होने का अभ्यास करो - इससे अन्य आत्माओं को भी एक सेकण्ड
में सारे ज्ञान का सार अनुभव करा सकेंगे।
स्लोगन:-
अपनी
वृत्ति को पावरफुल बनाओ तो सेवा में वृद्धि स्वत: होगी।
ये अव्यक्त इशारे-
“निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
यदि निश्चय रूपी
फाउण्डेशन पक्का है तो सहज योगी, निर्मल स्वभाव, शुभ भावना की वृत्ति और आत्मिक
दृष्टि वाले होंगे। चलन और चेहरे से हर समय सरलता की झलक अनुभव होती रहेगी। तो हरेक
की विशेषता को स्मृति में रख एक दो में फेथफुल रहो तो उनकी बातों का भाव बदल जायेगा।